पीलीभीत। टनकपुर बाईपास का निर्माण तीन वर्ष से अधर में लटका है। बाईपास के लिए मैलानी और टनकपुर रेलखंड पर ओवरब्रिज का निर्माण होना था। ओवरब्रिज निर्माण को लेकर पीडब्ल्यूडी के अभियंताओं ने पीटीआर (पीलीभीत टाइगर रिजर्व) से एनओसी (अनापत्ति प्रमाणपत्र) नहीं ली। इससे दोनों ओवरब्रिज का निर्माण पिछले छह माह से बंद है। हालांकि एक सप्ताह पहले ओवरब्रिज निर्माण को एक एनओसी मिली गई है। दूसरी एनओसी का इंतजार किया जा रहा है। 2020 में ओवरब्रिज का निर्माण पूरा करने की समय सीमा भी दो साल पहले निकल चुकी है।
लंबे समय से शहर के बीचोबीच से टनकपुर हाईवे गुजर रहा है। इस हाईवे से दिनभर में करीब दस हजार भारी वाहन गुजरते हैं। इससे शहर में दुर्घटना होने की आशंका बनी रहती है। शहर को भारी वाहनों से मुक्त रखने के लिए शासन ने शहर के बाहर असम हाईवे से टनकपुर हाईवे के बीच 114 करोड़ की लागत से 11 किलोमीटर लंबे बाईपास की स्वीकृति दी थी। 2016 में निर्माण शुरू हुआ था। इस बाईपास में टनकपुर और मैलानी रेलखंड के दो ओवरब्रिज भी प्रस्तावित थे।
62 करोड़ की लागत से पीडब्ल्यूडी ने सड़क का निर्माण शुरू कराया था। जबकि दोनों रेल खंडों पर ओवरब्रिज के निर्माण की जिम्मेदारी राज्य सेतु निगम को दी गई थी। दोनों ओवरब्रिज का मुख्यमंत्री ने शिलान्यास किया था। 607 मीटर लंबे एक ओवरब्रिज का निर्माण 2680.60 लाख रुपये की लागत से शुरू हो गया था। फरवरी 2019 में निर्माण शुरू होकर दिसंबर 2020 में पूरा होना था। इतने ही लागत और समय से दूसरे ओवरब्रिज का निर्माण होना था।
कार्यदायी संस्था ने दोनों ओर के संपर्क मार्ग और ओवरब्रिज का निर्माण कर लिया था। रेलवे के ऊपर का हिस्से का निर्माण शुरू हुआ, तो पीटीआर ने अपनी जमीन बताते हुए निर्माण कार्य पिछले छह माह पहले रुकवा दिया था। हालांकि एक सप्ताह पहले टनकपुर रेलखंड के ओवरब्रिज की एनओसी मिल गई है। जबकि मैलानी रेलखंड के ओवरब्रिज का इंताजर किया जा रहा है। पीडब्ल्यूडी की लापरवाही से सालों बाद भी बाईपास पर आवागमन शुरू नहीं हो सका।
पहले रेलवे, अब पीटीआर ने रोका निर्माण
ओवरब्रिज के निर्माण जब अंतिम छोर पर एक साल पहले पहुंचा था तो ट्रैक के ऊपर रेलवे ने पुल बनाने का नक्शा देने में छह माह लगा दिए थे। इससे काम बंद रहा। जबकि छह माह पहले रेलवे ने कार्यदायी संस्था को नक्शा दे दिया और निर्माण के लिए पिलर लगाने का काम शुरू किया गया तो पीटीआर ने खुद की जमीन बताते हुए अपत्ति जताते काम रुकवा दिया। इस पर पिछले पांच माह से फिर दोनों ओवरब्रिज का काम बंद हो गया।
ओवरब्रिजों का 23 माह में पूरा होने था काम, मगर 42 माह बाद भी अधूरा
बाईपास का निर्माण शुरू होने के बाद फरवरी 2019 में दोनों ओवरब्रिज का निर्माण शुरू हुआ था। दोनों का निर्माण दिसंबर 2020 में पूरा होने था। मगर पहले कोरोना में काम बंद रहा। इसके बाद रेलवे और पीटीआर की दखलंदाजी से निर्माण रुक गया। आलम यह है कि 23 माह में पूरा होने वाला काम, 48 माह बाद भी अधूरा है।
लापरवारी बन सकती है दुर्घटना का सबब
बाईपास के दोनों ओवरब्रिज का निर्माण शुरू होने से भले ही चौपहिया और भारी वाहनों का आवागमन शुरू नहीं हुआ है, मगर छोटे वाहन और बाइक सवार इस हाईवे पर फर्राटा भरते नजर आते हैं। मगर असम हाईवे और टनकपुर हाईवे की मोड़ पर कोई संकेत बोर्ड और ब्रेकर नहीं बनाए गए हैं। इससे बाइक सवार अचानक दोनों हाईवे पर पहुंच जाते है। दोनों हाईवे पर दिनभर वाहन दौड़ते रहते है। ऐसे में पीडब्ल्यूडी की लापरवाही से बाईपास के दोनों हिस्से हादसों का सबब बनी हुई।
दोनों ओवरब्रिज का निर्माण पीटीआर से एनओसी न मिलने पर रुकवाया गया था। उसी समय एनओसी के लिए आवेदन कर दिया गया था। टनकपुर रेलखंड की सप्ताह भर पहले एनओसी मिल गई है। मैलानी रेल खंड की एनओसी भी जल्दी ही मिलने की संभावना है। एनओसी मिलने के बाद मार्च 2023 तक काम पूरा कर लिया जाएग। -आरके श्रीवास्तव, सहायक अभियंता, राज्य सेतु निगम
टनकपुर बाईपास का असम हाईवे पर निकलने वाला मार्ग दे रहा दुर्घटना को आमंत्रण। संवाद- फोटो : PILIBHIT