प्रदेश में भाजपा की सरकार गठन को लेकर चल रही प्रक्रिया के बीच जिले में मंत्री पद को लेकर भागदौड़ शुरू हो गई है। वर्ष 1991 के बाद जिले की चारों सीटों पर भाजपा का कब्जा होने के कारण और सपा सरकार में जिले से दो मंत्री बनाए जाने की उम्मीद है। जिले के इतिहास में वर्ष 1991 में रामलहर के दौरान जिले की चारों विधान सभा सीटों पर भाजपा ने कब्जा जमाया था। उसके बाद विधानसभा चुनाव 2017 में जिले की चारों सीटों पर भाजपा ने कब्जा कर 1991 के इतिहास दोहराया था। यहां जब भी भाजपा मजबूत हुई तब जिले को लालबत्ती मिली। 1991 में बीसलपुर से चुनाव जीते रामसरन वर्मा को प्रदेश सरकार में दुग्ध विकास उपमंत्री बनाया गया था। इसके बाद 1996 में शहर सीट से चुनाव जीतीं तत्कालीन चर्चित आईएएस अधिकारी राय सिंह की पत्नी राजराय को भी वित्त राज्यमंत्री बनाया गया। 2002 में पूरनपुर से भाजपा टिकट पर विधायक निर्वाचित हुए डॉ. विनोद तिवारी भी स्वास्थ्य मंत्री बनाए गए। केंद्रीय मंत्री मेनका संजय गांधी का संसदीय क्षेत्र होने के नाते और इससे पहले प्रदेश में रही सपा सरकार में दो मंत्री रहने को लेकर यह माना जा रहा है कि जिले को कम से कम एक लालबत्ती तो जरूर मिलेगी। मंत्री बनाए जाने को लेकर जिन नामों की चर्चा चल रही है उसमे सबसे अधिक चर्चा शहर सीट से विधायक निर्वाचित संजय गंगवार पहले नंबर पर बताए जा रहे हैं। वह कुर्मी बिरादरी के हैं और जिले में कुर्मी मतदाताओं की संख्या अधिक है। माना जा रहा है कि भाजपा उन्हें लालबत्ती देकर इसका लाभ लोक सभा चुनाव में ले सकती है। संजय शहर सीट पर पिछले डेढ़ दशक से काबिज सपा सरकार के कद्दावर नेता एवं कैबिनेट मंत्री हाजी रियाज अहमद को हरा विधान सभा पहुंचे हैं। इसके अलावा जिले में निर्वाचित भाजपा विधायकों में सबसे अधिक वोट पाने का रिकार्ड भी बनाया है। सबसे अधिक वोट पाने वाले प्रदेश के विधायकों में उनका पांचवां स्थान है। ऐसे में यह कहा जा सकता है कि सबसे अधिक वोट पाने वाले विधायकों की टॉप फाइव सूची में उनका नाम शामिल है। संगठन में उनकी मजबूत पकड़ है और मेनका गांधी और संगठन दोनों के वह नजदीक बताए जा रहे हैं। इस लिहाज से उन्हें लालबत्ती मिल सकती है। जिले से दूसरा नाम बीसलपुर से विधायक निर्वाचित हुए रामसरन वर्मा का चल रहा है। वह 1991 की रामलहर में चुनाव जीत उपमंत्री रह चुके हैं। बीसलपुर विधान सभा सीट पर वह लगातार दूसरी बार विधायक निर्वाचित हुए हैं। इससे पहले भी वह दो बार विधायक रह चुके हैं। पुराने नेता और अनुभव होने के कारण उन्हें भी मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है।