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श्रेष्ठ जीवन के लिए श्रेष्ठ आचरण आवश्यक

Thu, 03 Mar 2016 11:24 PM IST
पीलीभीत।
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 आर्यसमाज के तत्वावधान में बृहस्पतिवार से ऋषि बोधोत्सव का देवयज्ञ के साथ शुभारंभ हो गया।
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शहर के स्टेशन रोड स्थित आर्यसमाज मंदिर में शुरू हुए पांच दिवसीय बोधोत्सव के तहत देवयज्ञ हुआ। इसमें यजमान स्वदेश भसीन और मुनींद्रपाल सिंह ने सपत्नीक आहुतियां दीं। बदायूं से आए आचार्य संजीव रूप ने कहा कि जब तक व्यक्ति ईश्वर का भजन करता रहेगा, तब तक उसे पाप नहीं लगेगा। दूसरे शब्दों में भजन संसार में कर्तव्यबोध कराने वाला होना चाहिए, न कि व्यक्तिपरक। जयपुर से आए वैदिक प्रवक्ता आचार्य उषर्बुध ने मनुष्य की आंतरिक और वाह्य संरचना का विश्लेषण करते हुए पांच बिंदुओं पर प्रकाश डाला। कहा, मनुष्य का शरीर धर्म का प्रमुख साधन है। शरीर के अंदर इंद्रियों के शक्तिशाली होने और उनके ठीक प्रकार के कार्य करने के पीछे उसका मन ही है। मन की संकल्पशक्ति के कारण ही जीवों में श्रेष्ठ कहा जाता है। मन की ऊर्जा के ठीक दशा में काम करने से ही मनुष्य उन्नति के शिखर तक पहुंचता है। मन के ठीक दिशा में कार्य करने को ही यज्ञ कहा जाता है। जीवन को श्रेष्ठ बनाने के लिए श्रेष्ठ आचरण अति आवश्यक है। आचरण विचारों से बनता है। इस मौके पर अध्यक्ष तेजनरायन गंगवार, वासुदेव गंगवार, कृष्णअवतार कंसल, बसंतलाल, राजेंद्र गंगवार, पीएन अग्रवाल, सुरेंद्र सक्सेना, धर्मदेव, करुणाशंकर सक्सेना, कृपाशंकर, देवेंद्र कुमार शर्मा आदि मौजूद रहे। आर्यसमाज अध्यक्ष ने बताया कि कार्यक्रम सात मार्च तक सुबह शाम चलेगा।
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