शारदा डैम की तलहटी में बसी बंगाली समाज की कॉलोनियां । संवाद
कलीनगर। कई वर्षों से खुद के लिए आशियाना और मालिकाना हक समेत मांगों को लेकर प्रयासरत बंगाली समाज के लोग अब अपनी आवाज बुलंद करने के लिए एकजुट हो रहे हैं। जनपद के मटैया लालपुर में 11 फरवरी को होगी, जिसमें अनुसूचित जाति आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष अरुण हलदार भी आ रहे हैं। समाज के प्रदेशभर के लोगों को शामिल होने का न्योता दिया गया है।
जनपद की कलीनगर तहसील के तराई इलाके में वर्ष 1965 से लेकर 1971 तक पूर्वी पाकिस्तान से आए विस्थापित परिवारों को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के निर्देश के बाद शारदा सागर डैम की तलहटी में बसाया गया था। इन परिवारों को प्रशासन की ओर से आवास मुहैया कराए गए थे, लेकिन वर्ष 1989 में आई भीषण बाढ़ से 500 से अधिक परिवारों के आशियाने उजड़ गए। पिछले साल यहां आईं राज्यपाल आंनदीबेन पटेल के सामने भी इन लोगों ने आवास दिलाने की मांग रखी थी।
पूर्व में यहां की सांसद रहीं मेनका गांधी ने भी प्रयास किए थे। अब लोकसभा चुनाव नजदीक है। ऐसे में अनुसूचित जाति के दर्जा मिलने समेत अन्य मांगों को लेकर बंगाली समाज ने एक बार फिर आवाज बुलंद करने का प्रयास किया है। इसकी रणनीति बनाने के साथ दिल्ली तक दौड़भाग भी की गई। अनुसूचित जाति आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष अरुण हलदार से सहयोग मांगा गया। 11 फरवरी को शारदा डैम की तलहटी में बसे गांव मटैया लालपुर में सभा का आयोजन होगा। प्रधान शंकर राय ने बताया कि सभा में प्रदेशभर से बंगाली समाज के लोग आएंगे।
विस्थापित परिवारों के बीच दो दिन रही थीं राज्यपाल
तराई क्षेत्र में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल तीन दिवसीय दौरे पर यहां आई थी। वह दो दिन तक विस्थापित परिवारों के बीच रहीं। इनका रहन- सहन, खेती करने का तरीका आदि देखा था। महिलाओं से संवाद किया। लोगों ने अपनी समस्या राज्यपाल को बताई थी। कुछ लोगों ने ज्ञापन दिया था। लखनऊ लौटने के बाद राज्यपाल ने अपने सचिव के जरिये जिला प्रशासन से रिपोर्ट भी मांगी है।
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झोंपड़ियों में परिवार के साथ कर रहे गुजर-बसर
विस्थापित परिवारों की स्थिति यह है कि शारदा सागर डैम किनारे कुछ लोग झोंपड़ियों में रह रहे हैं। खेती करके जीवन-यापन करते हैं। किसी सुरक्षित जगह पर आवास न मिलने के कारण हर साल इन्हें बाढ़ में परेशान होना पड़ता है। कुछ लोगों ने बटाई पर जमीन ले रखी है।