जिले की चारों सीटों पर कब्जा कर भाजपा ने रिकार्ड कायम किया है। इस चुनाव में जहां भाजपा की लहर का असर दिखा वहीं मतदाताओं की प्रत्याशियों के प्रति सहानुभूति भी झलकी। शहर विधानसभा में कैबिनेट मंत्री हाजी रियाज अहमद को हराकर विधायक बने भाजपा के संजय गंगवार के साथ जनता की सहानुभूति साफ दिखाई दी। 2012 के चुनाव में संजय गंगवार ने हाजी रियाज अहमद के खिलाफ बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था। इसमें रियाज अहमद से लगभग चार हजार मतों से परास्त हो गए थे। इस चुनाव में प्रचार के दौरान संजय एवं उनके समर्थकों ने इस बात का भी जिक्र हर जगह करते हुए पिछली गलती को न दोहराने की अपील की थी। इसका असर चुनाव में दिखा और जनता ने संजय को सिर आंखों पर बैठाकर रिकार्ड 1.35 लाख वोट देकर विजयी बनाया। इसके उलट बरखेड़ा विधानसभा में भाजपा की लहर ने सभी को धराशायी कर दिया। भाजपा से टिकट न मिलने पर मेनका गांधी के प्रबल समर्थक स्वामी प्रवक्तानंद ने रालोद से नामांकन कराया। प्रारंभ में उनके साथ जनता की हमदर्दी भी दिखी जबकि भाजपा के किशनलाल राजपूत को हर कोई हल्के में आंक रहा था लेकिन प्रदेश सहित जिले में चली भाजपा की लहर में साधारण व्यक्तित्व के किशनलाल राजपूत को जिले की सबसे बड़ी जीत दिलाकर विधायक चुना। पूरनपुर विधानसभा सीट पर भाजपा के बाबूराम पासवान ने भी पिछला चुनाव इसी सीट पर लड़ा था और सपा की लहर के बावजूद उन्हें 43 हजार मत मिले थे। उन्हें सपा के पीतमराम ने लगभग तीस हजार मतों के अंतर से परास्त किया था। इस चुनाव में जनता की सहानुभूति उनके साथ थी जिसे कैश कराने में मोदी लहर के साथ मेनका की सभाओं ने भी मदद मिली और वह 1.28 लाख पाकर विधायक बने। बीसलपुर सीट पर भाजपा के रामसरन वर्मा का उनके चिरपरिचित प्रतिद्वंद्वी अनीस अहमद उर्फ फूलबाबू से मुकाबला था। 2012 के चुनाव में भी दोनों आमने सामने थे लेकिन अनीस अहमद बसपा के प्रत्याशी थे। इस बार अनीस अहमद कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े और सपा से उनका गठबंधन था लेकिन बीसलपुर क्षेत्र में अपनी ईमानदार छवि के लिए पहचाने जाने वाले रामसरन वर्मा को भाजपा लहर का साथ मिला। हालांकि उन्हें गत चुनाव से कम मत मिले इसके बाद भी उन्होंने जीत दर्ज की।