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Pilibhit News: कुनबा बढ़ा तो मुश्किल होने लगा जंगल में रहना... बाघ और तेंदुए खेतों में तलाश रहे ठिकाना

Fri, 01 Sep 2023 12:18 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
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बाघ का फोटो ।
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कलीनगर। टाइगर रिजर्व में बाघ और तेंदुओं की संख्या में इजाफा क्या हुआ, उनका जंगल से बाहर आबादी और खेतों की तरफ रुख होने लगा है। वन विभाग के अफसर भी मानते हैं कि वन्यजीवों की बढ़ती संख्या के लिहाज से जंगल छोटा पड़ने लगा है, इसलिए वे ठौर-ठिकाने के लिए खेतों का रुख कर रहे हैं। यही वजह है कि मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं भी बढ़ रही हैं। वन्य जीवों को जंगल से बाहर निकलने से रोकना वन विभाग के लिए चुनौती बन गया है।
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पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या लगातार बढ़ रही है। तेंदुओं, भालुओं का कुनबा भी बढ़ रहा है। इसके बावजूद उनकी सुरक्षा और जंगल में ही उनके वास के ठोस इंतजाम आज तक नहीं किए जा सके हैं। इधर, जंगलों से सटे इलाकों में मानव आबादी भी लगातार बढ़ रही है। मानव का जंगल में दखल भी बढ़ा है, इससे आए दिन वन्य जीवों का मानव से आमना-सामना हो रहा है। टाइगर रिजर्व के जिम्मेदार इस मामले में मौन धारण किए हुए हैं। जहां खेती नहीं होती थी, जमीन दलदली है वहां भी बस्तियां बसने लगी हैं।



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जंगल के बाहर अलग-अलग क्षेत्रों में विचरण कर रहे हैं 6-7 बाघ



पीलीभीत टाइगर रिजर्व से निकलकर बाघ अलग-अलग क्षेत्रों में विचरण कर रहे हैं और दहशत का पर्याय बने हुए हैं। जंगल से सटे सेल्हा गांव में बाघ ने एक किशोरी को निवाला बना लिया था। वहीं हरदोई ब्रांच नहर पटरी पर लंबे समय से बाघ का आना-जाना लगा है। रिछोला पुलिस चौकी के पास भी बाघ देखा जा रहा है। मथना के पास गांव रानीगंज में भी दो बाघ विचरण कर रहे हैं। एक बाघ रानीगंज में दो लोगों को मौत के घाट उतार चुका। बुधवार से बाघ फिर वहीं देखा गया है।
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ग्रामीणों के लिए मुसीबत बना है तेंदुआ

माधोटांडा, पूरनपुर, बाइफरकेशन क्षेत्र में बाघ की दहशत होने के साथ ही अमरिया क्षेत्र के जंगल से सटे गांवोंं में तेंदुए का आतंक है। तेंदुए को पकड़ने या उसे जंगल में ही रोकने के लिए वन विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस प्रयास नहीं किए जा सके हैं। वन विभाग सिर्फ निगरानी कराने तक ही सीमीति है।



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छोटा पड़ने लगा है जंगल : खंडेलवाल
पीटीआर के डिप्टी डायरेक्टर नवीन खंडेलवाल का कहना है कि बाघ, तेंदुआ सहित अन्य वन्य जीवों की संख्या में इजाफा हुआ है। इससे उनके रहन-सहन का स्थान कम पड़ने लगा है। ऐसी स्थिति में नए ठिकाने की तलाश में वन्यजीवों का जंगल से बाहर निकलना स्वाभाविक है। जंगल में ही वन्यजीवों को रोकने के लिए कार्य योजना तैयार की जा रही है।

बाघ का फोटो ।

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