पीलीभीत। मानसून के सक्रिय होते ही जंगल में कटरुआ बीनने वाले ग्रामीणों की घुसपैठ शुरू हो गई है। वनकर्मियों की सख्ती और वन्यजीवों से खतरा होने के बावजूद जंगल से सटे गांवों के लोग जानजोखिम में डालकर जंगल में कटरुआ बीनने पहुंच रहे हैं। हालांकि अभी कटरुआ काफी कम मात्रा में ही मिल पा रहा है। घुसपैठ को रोकने के लिए अफसरों ने गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
बरसात शुरू होते ही टाइगर रिजर्व के जंगलों में धरती के फूल (कटरुआ) बीनने के लिए आसपास गांवों के लोगों का पहुंचना शुरू हो जाता है। हालांकि जंगल में किसी भी बाहरी व्यक्ति का प्रवेश वर्चित है, लेकिन ये लोग वनकर्मियों से सांठगांठ कर चोरी-छिपे कटरुआ बीनने के लिए जंगल में घुस जाते हैं। पूर्व में जंगल क्षेत्र में कटरुआ बीनते समय ग्रामीण बाघ और भालू के शिकार भी हो चुके हैं।
इधर, बरसात शुरू होते ही एक बार फिर कटरुआ बीनने वाले ग्रामीण सक्रिय हो गए हैं। जंगल के मुख्य मार्गों से ही लोगों की जंगल में घुसपैठ देखी जा रही है। वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए अफसर गंभीर हो गए हैं। इसके लिए अफसरों ने सभी रेंज के प्रभारियों को कटरुआ बीनने वाले के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और उन्हें जंगल में प्रवेश न करने देने के निर्देश दिए हैं। डिप्टी डायरेक्टर नवीन खंडेलवाल ने बताया कि जंगल में अवैध घुसपैठ रोकने के आदेश दिए गए हैं। पकड़े जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।