कलीनगर। रानीगंज गांव के राममूर्ति के परिवार में कोहराम मचा है। बाघ रामूर्ति को खेत से खींचकर जंगल में ले गया था। अगले दिन उनका अधखाया शव मिला। पोस्टमार्टम के बाद राममूर्ति का शव घर पहुंचा तो परिजन उनके अंतिम दर्शन करने की भी हिम्मत नहीं जुटा सके। डेढ़ महीने में यह दूसरी घटना है। बाघ गांव वालों के लिए दहशत का पर्याय बन चुका है। ग्रामीणों की आंखों में दहशत के साथ ही आक्रोश साफ दिख रहा है।
राममूर्ति की मौत के बाद पत्नी कोकिला देवी और तीनों बेटे चंद्रपाल, विजयपाल व चन्नीपाल का रोरोकर बुरा हाल है। ग्रामीणों का कहना है कि एक-एक कर बाघ ग्रामीणों का शिकार कर रहा है और वन विभाग के अधिकारी महज निगरानी का आश्वासन देकर चले जाते हैं। जाल फैंसिंग की बात 28 जून को तब भी कही गई थी जब इसी गांव के लालता प्रसाद को बाघ खेत से उठाकर ले गया था। उन्हें भी इसी तरह से मार डाला था। लालता प्रसाद के शरीर के कई टुकड़े दूसरे दिन जंगल से बरामद हुए थे। ग्रामीणों का मानना है कि बाघ के हमले तब तक नहीं रुकेंगे जब तक जाल फैंसिंग नहीं होगी।