माधोटांडा। पेड़ से गिरी लकड़ी ई-रिक्शा पर रखना चालक को भारी पड़ गया। आरोप है कि बराही वन क्षेत्र के वनकर्मियों ने चालक को जंगल के भीतर ले जाकर डंडों से पीटा। चालक का आरोप है कि उसे छोड़ने के एवज में 50 हजार रुपये की मांग भी की गई। शिकायत मिलने पर पुलिस ने घायल चालक का मेडिकल परीक्षण कराया। मामला सामने आने के बाद वनकर्मी भी थाने पहुंचे, जहां पुलिस ने उनसे पूछताछ की। पुलिस मामले की जांच में जुटी है। पूरनपुर क्षेत्र के रम्पुरा गांव निवासी मेराज ई-रिक्शा चलाता है। उसने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि सोमवार को वह ई-रिक्शा लेकर माधोटांडा क्षेत्र के गभिया सहराई गांव गया था। वहां से लौटते समय बाईफरकेशन मार्ग पर सड़क किनारे पेड़ से गिरी लकड़ी की टहनी दिखाई दी। चूल्हे में जलाने के लिए उसने लकड़ी ई-रिक्शा पर रख ली। मेराज के मुताबिक, इसी दौरान बराही वन क्षेत्र में तैनात वनरक्षक विकास और भगवानदीन दो अन्य वनकर्मियों के साथ वहां पहुंच गए। उन्होंने ई-रिक्शा पर लकड़ी रखने का कारण पूछा। चालक ने चूल्हे में जलाने के लिए लकड़ी ले जाने की बात बताई। वनकर्मियों के विरोध पर उसने लकड़ी वहीं उतार दी। आरोप है कि लकड़ी उतारने के बावजूद वनकर्मी उसे जंगल के भीतर ले गए। वहां डंडों से उसकी पिटाई की गई। चालक ने यह भी आरोप लगाया कि उसे छोड़ने के बदले 50 हजार रुपये मांगे गए। घटना के बाद उसने पुलिस से शिकायत की। पुलिस ने उसका मेडिकल परीक्षण कराया। इधर, मामले की जानकारी मिलने पर वनकर्मी भी थाने पहुंचे। पुलिस ने उन्हें थाने में बैठाकर पूछताछ की।
सीओ विधि भूषण मौर्य ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। मेडिकल रिपोर्ट और जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। संवाद