पीलीभीत। सर्दी का सीजन शुरु होते ही गन्ना भरे ओवरलोड वाहन हादसे का सबब बन रहे हैं। शनिवार को शहर की ओर आ रहे गन्ने से भरे एक ओवरलोड ट्रक की चपेट में आकर गजरौला निवासी ग्रामीण की जान चली गई थी। शहर की सड़क पर कई बार हादसे होते-होते बचे। बावजूद इसके इन ओवरलोड ट्रकों को अनदेखा किया जा रहा है।
शहर में एक दिन में करीब 250 से 350 गन्ने से भरे ट्रक शहर में आते हैं। खास बात यह है कि टनकपुर हाईवे शहर के बीच से होकर गुजर रहा है। कई सरकारी कार्यालय, कलक्ट्रेट, कचहरी, मेडिकल कॉलेज हाईवे के किनारे ही हैं। यहां तक कि शहर के अधिकांश बड़े स्कूल हाईवे के किनारे हैं। इतना व्यस्ततम मार्ग होने के बाद भी गन्ने से ओवरलोड ये ट्रक शहर में घुस रहे हैं।
बीते साल गन्ने से भरे ट्रक से कुचलकर शहर के गौहनियां चौराहे पर साइकिल सवार की मौत भी हो गई थी। शनिवार को ओवरलोड गन्ना भरे ट्रक की चपेट में आकर गजरौला के ग्रामीण की जान चली गई। इसके अलावा कई बार हादसे होते होते बचे, लेकिन अधिकारियों को ओवरलोड ट्रक नहीं दिख रहे। लगता है प्रशासन किसी बड़े हादसे के इंतजार में है। जिम्मेदार महज आंकड़ेबाजी कर कागजों का पेट भर रहे हैं।
ढाई माह में ओवरलोड ट्रक मिले महज 51
गन्ने का सीजन नवंबर से शुरू हो जाता है। इस दौरान एआरटीओ के द्वारा नवंबर में गन्ने से भरे महज 17 ओवरलोड वाहन ही दिखे। पूरे दिसंबर में महज 22 गन्ने से भरे ओवरलोड ट्रक दिखे, जबकि जनवरी में अभी तक 12 ओवरलोड ट्रकों के खिलाफ ही कार्रवाई की गई। चूंकि आंकड़ेबाजी करनी है लिहाजा इस कार्रवाई में यातायात पुलिस भी शामिल हो जाती है। जब जिस विभाग से शासन से ओवरलोड कार्रवाई के बारे में पूछा जाता है तो इन्हीं आंकड़ों को दिखा दिया जाता है, जबकि हाल यह है कि शहर में रोजाना गुजरने वाले 350 ओवरलोड ट्रकों में से हर दूसरा या तीसरा ट्रक ओवरलोड होता है।
स्टेशन रोड जैसी व्यस्त सड़क से होकर जा रहे ट्रक
गन्ने से लदे ट्रकों को एक रूट दिया गया है। वह गौहनिया चौराहे से होते हुए एलएच चीनी मिल तक आएंगे और इसी रास्ते से लौटेंगे, लेकिन गन्ना उतारने के बाद ये खाली ट्रक स्टेशन रोड जैसे भीड़ वाले इलाके से होकर गुजरते हैं। खंभों पर लाइट न होने के कारण रात में यहां अंधेरा रहता है। ट्रेन से आने जाने वाले समय ई रिक्शा, ऑटो आदि इसी रोड से जाते हैं। बावजूद इसके खाली ट्रक इस रास्ते से गुजरते हैं। करीब 25 दिन पहले एक छात्र छतरी चौराहे पर ट्रक के नीचे आ गया था। गनीमत रही बच गया। इस तरह के हादसे यहां होते रहते हैं। दुकानदार इसका विरोध भी कर रहे हैं लेकिन सुनने वाला कोई नहीं। संवाद
ये है नियम
अमूमन 10 टायरा ट्रक में 28 टन से ज्यादा गन्ना नहीं ले जाया जा सकता, लेकिन इसमें 30-32 टन तक गन्ना भरकर ले जाते हैं। कई-कई तो 35 टन तक ले जाते हैं। नियमानुसार जमीन से चार मीटर से ज्यादा ऊंचा गन्ना ट्रक में नहीं भरा होना चाहिए। ट्रकों में इस कदर गन्ना भरा जा रहा है कि उसकी बॉडी से भी चार-पांच फीट ऊपर तक गन्ना निकला रहता है। ऐसे में इनको बॉडी तक को बांधना पड़ जाता है। इन ट्रकों का ओवर हाइट में चालान किया जाना चाहिए। लेकिन ऐसा हो नहीं रहा।
ओवरलोड में यातायात पुलिस चालान नहीं कर सकती। चूंकि इसमें कांटे की जरूरत होती है। यह अधिकार केवल एआरटीओ को ही है। - राघवेंद्र सिंह, टीएसआई
ओवरलोड वाहनों के विरुद्ध अभियान चलाकर कार्रवाई की जा रही है। साथ ही चालकों को भी ओवरलोड वाहनों का संचालन न करने निर्देश दिए जाते हैं। ओवरलोड वाहनों को लेकर अब अभियान चलाया जाएगा। - वीरेंद्र सिंह, एआरटीओ
शहर के गौंहनिया चौराहे से गुजरते गन्ना लदे ट्रक । संवाद
शहर के गौंहनिया चौराहे से गुजरते गन्ना लदे ट्रक । संवाद
शहर के गौंहनिया चौराहे से गुजरते गन्ना लदे ट्रक । संवाद