पीलीभीत/कलीनगर। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह समारोह में नाबालिग की शादी कराने के मामले में कलीनगर के ईओ की लापरवाही सामने आई है। जांच में सामने आया है कि आधार कार्ड का सत्यापन किए बिना ही ईओ ने रिपोर्ट भेज दी। ऐसे में कार्रवाई की संस्तुति करते हुए डीएम को रिपोर्ट भेजी गई है।
माधोटांडा क्षेत्र की एक महिला ने कोतवाली में तहरीर दी थी। जिसमें उसने बताया था कि 20 दिसंबर 2023 को उसके जेठ समेत चार लोग बीमारी में उसे देखने बरेली के जिला अस्पताल आए। यहां से उसकी 13 वर्ष पुत्री को बहला-फुसलाकर ले गए। इसके बाद 27 जनवरी, 2024 को मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह समारोह में कूटरचित दस्तावेजों के जरिये पुत्री का विवाह करा दिया गया।
मामला संज्ञान में आने के बाद डीएम संजय कुमार सिंह ने तीन सदस्यीय टीम गठित कर मामले की जांच सौंपी। टीम में एसडीएम कलीनगर, उपायुक्त उद्योग केंद्र व बीडीओ पूरनपुर को शामिल किया गया। टीम ने समाज कल्याण विभाग से पूरे प्रकरण से संबंधित मूल पत्रावली प्राप्त कर स्वीकृति से पूर्व आवेदन की जांच करने वाले अधिशासी अभियंता, शिकायतकर्ता और उसकी पुत्री के बयान दर्ज किए।
जांच में सामने आया कि 17 जनवरी 2024 को योजना के तहत शादी के लिए ऑनलाइन आवेदन में संलग्न किए गए आधार कार्ड में अंकित जन्मतिथि को सही मानकर उसे पात्र माना गया, अन्य प्रपत्रों को नहीं देखा गया। जबकि शासनादेश के तहत विवाह के लिए किए गए आवेदन में पुत्री की आयु, शादी की तिथि को 18 वर्ष या उससे अधिक होना अनिवार्य था।
बता दें कि आयु की पुष्टि के लिए स्कूल का शैक्षिक रिकॉर्ड, जन्म प्रमाणपत्र, मतदाता पहचान पत्र, मनरेगा जॉब कार्ड, आधार कार्ड मान्य है। बावजूद इसके अधिशासी अधिकारी ने सिर्फ आधार कार्ड देखा, अन्य प्रपत्रों को आधार पर उसका सत्यापन नहीं किया। एसडीएम आशुतोष गुप्ता ने बताया कि नगर पंचायत कलीनगर के अधिशासी अभियंता की लापरवाही मानते हुए कार्रवाई के लिए विस्तृत रिपोर्ट डीएम को भेजी गई है।
आधार कार्ड को छोड़ शेष अभिलेखों में आयु निकली 13 साल
जांच टीम ने आयु निर्धारण करने के संबंध में विभिन्न स्तर से अभिलेख देखे। आधार कार्ड में किशोरी की आयु 18 अक्तूबर 2004 अंकित थी। जबकि शैक्षिक स्थानांतरण प्रमाण पत्र, प्रवेश पंजिका और स्टूडेंट डाटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम के ऑनलाइन रिकॉर्ड में उसके आयु 22 अप्रैल 2011 व जन्म प्रमाणपत्र में आठ सितंबर 2011 अंकित थी।