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50 हजार में अधिवक्ता ने जेल जाए बिना जमानत की ली थी जिम्मेदारी

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जेल
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पीलीभीत। गोवध अधिनियम के मुकदमे में बिना जेल गए आरोपी गौसे आलम की जमानत कराने के लिए अधिवक्ता ने 50 हजार रुपये में जिम्मेदारी ली थी। गौसे आलम की पहचान देकर सितंबर माह में जेल भिजवाए गए दूसरे युवक को इसके लिए तीन सौ रुपये प्रतिदिन के हिसाब से अदा किए गए थे। रविवार देर शाम मुख्य आरोपी के गिरफ्त में आने के बाद पूछताछ में सारी सच्चाई सामने आ गई है। अब पुलिस जालसाजी में शामिल अन्य आरोपियों की धरपकड़ में जुट गई है।
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सुनगढ़ी थाना में 26 दिसंबर 2016 को दर्ज किए गए जानलेवा हमला, तोड़फोड़ व गोवध अधिनियम के मुकदमे में मुख्य आरोपी मैनाठेर (मुरादाबाद) के ग्राम डिगरपुर निवासी गौसे आलम ने अधिवक्ता शकील अहमद से साठगांठ कर आठ सितंबर 2017 को अपनी पहचान देकर दूसरे युवक को कोर्ट में सरेंडर करा दिया था। उसकी चार अक्तूबर को जमानत भी करा दी गई थी। चार दिसंबर को बयान लेने जाने के बाद पूरा मामला उजागर होने पर नौ दिसंबर को देर शाम कोतवाली थाने में विवेचक भिकारीपुर चौकी प्रभारी बलवीर सिंह ने गौसे आलम, अधिवक्ता शकील अहमद समेत चार के खिलाफ धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इस मामले में रविवार देर शाम सुनगढ़ी पुलिस ने आरोपी गौसे आलम को धर दबोचा। उससे थाने में पूछताछ की गई, तो पूरा मामला आइने की तरह साफ हो गया।
एसएचओ मुहम्मद कासिम ने बताया कि आरोपी वकील शकील अहमद ने गोवध अधिनियम के आरोपी गौसे आलम से 50 हजार रुपये लिए थे। इसमें उसको बिना जेल गए किसी अन्य को भेजकर जमानत कराने की जिम्मेदारी दी थी। इसी के तहत पांच हजार अलग से लिए गए। इसके बाद एक युवक को गौसे आलम की पहचान देकर हाजिर करा दिया गया था। उसको अधिवक्ता के स्तर से तीन सौ रुपये प्रतिदिन के हिसाब से खर्च दिया गया। जेल जाने वाला युवक कौन था, इसकी जानकारी गौसे आलम को नहीं है। पकड़े गए आरोपी का चालान कर दिया गया है, पूरे मामले की बारीकी से जांच कराई जा रही है।
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