पीलीभीत। वन्यजीवों की सुरक्षा और मानव वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम के लिए डब्ल्यूटीआई की ओर से चले रहे दो दिवसीय कार्यशाला के अंतिम दिन शुक्रवार को मुस्तफाबाद गेस्टहाउस पर वनकर्मियों को ट्रेंक्यूलाइज गन चलाने का प्रशिक्षण दिया गया। इसके अलावा कैमरा ट्रेप और पगचिह्न ट्रेस करने की भी जानकारी दी गई। टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों की संख्या में इजाफा होने के चलते आबादी की ओर चहलकदमी बढ़ गई है। जिसके चलते वन्यजीवों की सुरक्षा और मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम के ठोस प्रयास जरूरी हो गए है। इस सबके चलते डब्ल्यूटीआई की ओर से गुरुवार को दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया था। इधर, कार्यशाला के अंतिम दिन मुस्तफाबाद में डब्ल्यूटीआई के प्रेमचंद्र पांडे ने वन्यजीवों को किस स्थिति में कैसे ट्रेंक्यूलाइज किया जाता है, वनकर्मियों को इसका प्रशिक्षण दिया गया। इसके अलावा जंगल से बाहर मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति का सामना करने के भी गुर सिखाए गए। वन्यजीवों की सुरक्षा के लिहाज से लगाए जाने वाले लेजर कैमरे को लगाने के साथ ही पगचिह्नों को ट्रेस करने की जानकारी भी दी गई। इस मौके पर डॉ. दक्ष गंगवार, फ्रांसिस इस्माइल, दरोगा शेर सिंह, शंकर लाल, सिद्दीक मोहम्मद आदि वनकर्मी मौजूद रहे।