खेकड़ा (बागपत)।
नगर के मोहल्ला अहिरान स्थित बालाजी मंदिर के पुजारी विपिन शास्त्री ने बताया कि आषाढ़ पूर्णिमा को आदि गुरू वेद व्यास का जन्म हुआ । उन्होंने सनातन धर्म के चारों वेदों की व्याख्या की। उनके सम्मान में ही आषाढ़ मास की पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है। अबकी बार 27 जुलाई को गुरू पूर्णिमा पर चंद्रग्रहण का योग बन रहा है, जो रात्रि में 11 बजकर 54 मिनट से शुरू होकर सुबह 3 बजकर 49 मिनट तक लगभग चार घंटे रहेगा। रात्रि में 1 बजे से 2 बजकर 43 मिनट तक खग्रास स्थिति के कारण चंद्रमा दिखाई नहीं देगा। ग्रहण का सूतक दोपहर 2 बजकर 54 मिनट से लगने के कारण गुरू पूर्णिमा का महोत्सव सूतक लगने से पहले ही मनाया जाएगा।