फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Pilibhit News: दहेज के लिए पत्नी की हत्या वाले को 10 साल की कैद

विज्ञापन
विज्ञापन
पीलीभीत। विशेष न्यायाधीश (महिलाओं के विरुद्ध अपराध/त्वरित न्यायालय) चंद्र मोहन मिश्र ने दहेज के लिए पत्नी की हत्या के मामले में दोषी पति को 10 साल तो सास व ससुर को सात-सात साल कैद की सजा सुनाई है। साथ ही तीनों पर आठ-आठ हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
विज्ञापन


अभियोजन पक्ष के अनुसार बीसलपुर निवासी संजीव सैनी ने बीसलपुर थाने पर तहरीर देकर कहा कि उसने अपनी बहन वंदना सैनी का विवाह मोहल्ला बख्तावरलाल निवासी सतीश चंद्र सुमन व रामलली सुमन के पुत्र सुदीप सुमन के साथ किया था। उसने अपनी सामर्थ्य के अनुसार दहेज भी दिया। बावजूद इसके पति व सास-ससुर दहेज से संतुष्ट नहीं हुए और विवाह के कुछ दिन बाद से ही उसकी बहन वंदना को प्रताड़ित करने लगे।

20 मई 2019 को उसे सूचना मिली कि उसकी बहन की ससुराल वालों ने हत्या कर दी है। जब वह वहां पहुंचा तो बहन की लाश फर्श पर पड़ी थी और ससुराल वाले फरार थे। मुकदमा दर्ज किया गया। विवेचक ने विवेचना पूर्ण कर न्यायालय में दाखिल की। पत्रावली का अवलोकन करने, गवाहों के बयानों और साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने तीनों अभियुक्तों पर दोष सिद्ध पाते हुए सजा सुनाई।
विज्ञापन


चेक बाउंस होने पर आठ माह कैद की सजा

पीलीभीत। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट पूजा गुप्ता ने जारी चेक पर स्टाॅप पेमेंट कराने के मामले में दोष सिद्ध अभियुक्त को आठ माह कैद की सजा सुनाई। साथ ही परिवादिनी को 19,20,000 हजार रुपये क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया।
थाना सुनगढ़ी के नौगवां पकड़िया निवासी शिवांगी पांडेय ने न्यायालय में परिवाद दायर करते हुए कहा कि विपक्षी थाना कोतवाली के अवध नगर काॅलोनी निवासी रजनी दीक्षित ने उसे 16 लाख रुपये की धनराशि अदा करने के लिए चेक दिया था। 20 जनवरी 2023 को भुगतान के लिए चेक बैंक में लगाया। बैंक ने 25 जनवरी 2023 को यह कहते हुए चेक लौटा दिया कि चेक जारीकर्ता ने स्टाॅप पेमेंट लगवा दिया है।
वादिनी ने रजनी दीक्षित को अपने अधिवक्ता के माध्यम से रजिस्टर्ड डिमांड नोटिस भिजवाया। रुपये न मिलने पर उसने समस्त धनराशि 16 लाख रुपये रजनी दीक्षित से दिलाने के लिए परिवाद दायर किया। परिवादिनी ने अपने कथनों के समर्थन में कई दस्तावेज प्रस्तुत किए। वहीं दूसरी ओर रजनी दीक्षित ने कथानक को गलत बताते हुए कहा कि उसने कोई चेक नहीं दिया और न ही कोई देनदारी परिवादिनी के प्रति है।



यह भी कहा कि नोटिस नियम विरुद्ध है और मुकदमा गलत आधार पर चल रहा है। उसने यह भी कहा कि परिवादिनी उसकी पुत्र वधु है। उसने अनाधिकृत रूप से घर पर रखे चेक प्राप्त कर लिए। जिसके लिए वह जिम्मेदार नहीं है। परिवादिनी व उसके बीच कोई लेनदेन नहीं है। चेक पर हस्ताक्षर के अतिरिक्त उसने कोई प्रविष्टि नहीं की है। न्यायालय ने पत्रावली का अवलोकन और उपलब्ध साक्ष्यों व बयानों के आधार पर विपक्षी को सजा सुनाई।



इसके अलावा आरोपी महिला रजनी दीक्षित को चेक बाउंस के दूसरे परिवाद में भी मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट पूजा गुप्ता ने दोषी पाते हुए आठ माह की सजा और 2,40,000 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। इस मामले में भी परिवादिनी शिवांगी पांडेय की ओर से ही मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत करते हुए रजनी दीक्षित की ओर से जारी किए गए दो लाख के चेक के बाउंस होने पर मुकदमा दर्ज किया गया था। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें