मुजफ्फरनगर। वैदिक साधना संस्कृत विधा आश्रम चरथावल के अधिष्ठाता आचार्य दयादेव ने कहा कि युवा संस्कारों की शक्ति से जीवन का निर्माण करें।
पुरुषार्थी काॅलोनी में महर्षि दयानंद सरस्वती की 200वीं जयंती वर्ष में आयोजित कार्यक्रम में पधारे आचार्य ने कहा कि युवाओं का संस्कारित जीवन राष्ट्र की अमूल्य संपदा है। परिवार यज्ञ से जुड़ेंगे, तभी ऋषियों की वाणी घर-घर पहुंचेगी। प्रत्येक भारतीय का यह धर्म है कि सनातन वैदिक संस्कृति के आदर्शों, सिद्धांतो और परंपराओं से भावी पीढ़ी को अवगत कराएं। गुरुकुलों को पुर्नजीवित किया जाए, ताकि नए मत-मतान्तरों से राष्ट्र की रक्षा हो सके। वैदिक संस्कार चेतना अभियान संयोजक आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि सदाचरण ही धर्म की कसौटी है। आर्य समाज आनंदपुरी के पूर्व प्रधान जनेश्वर प्रसाद आर्य, सुरेंद्र कुमार, विशाल, प्रदीप आर्य, बालेश्वर, सत्यव्रत आर्य, गजेंद्र सिंह राणा, सहदेव सिंह आर्य, शांता प्रकाश आर्य, सुभाष आर्य, सुरेश चन्द्र आर्य, यज्ञदत्त आर्य ने विचार रखें।