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भक्ति के बिना नहीं हो सकती उपासना : ओमानंद

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संवाद न्यूज एजेंसी
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मोरना। स्वामी ओमानंद महाराज ने कहा कि भारतीय संस्कृति में भक्ति को उपासना का प्राण माना गया है। योग को उपासना का शरीर जिस तरह प्राण के बिना शरीर रह नहीं सकता। उसी तरह भक्ति बिना उपासना हो नहीं सकती। अपने आराध्य परमात्मा की भक्ति ही सर्वश्रेष्ठ भक्ति है।
भागवत पीठ श्री शुकदेव आश्रम, शुकतीर्थ के विट्ठल भवन और प्रत्यक्षानंद भागवत भवन में आयोजित श्रीमद्भागवत कथाओं का पीठाधीस्वर स्वामी ओमानंद महाराज ने दीप जलाकर शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि कलयुग में परमात्मा को प्राप्त करने का सर्वोत्तम साधन भक्ति है। तीनों सत्यों में भक्ति ही श्रेष्ठ है। भक्ति की भव्यता को समझने की शक्ति भागवत से मिलती है। भागवत भगवान कृष्ण का शब्द अवतार है।
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विट्ठल भवन में कथा व्यास श्रीकृष्ण सदाशिव मुरकर और प्रत्यक्षानंद भागवत भवन में वृंदावन से पधारे हुए निर्मोही अखाड़ा के राष्ट्रीय अध्यक्ष कथावाचक मदन मोहन दास, ग्वालियर से पधारे प्रमोद श्री वास्तव मौजूद रहे।
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