देवबंद। बच्चों की सुख समृद्धि और लंबी उम्र की कामना के लिए के लिए रविवार को माताओं ने अहोई माता का व्रत रखा। दोपहर को महिलाओं ने बुजुर्ग महिलाओं से अहोई माता की कथा सुनी और बच्चों के सुखी जीवन की कामना की। बुजुर्ग महिलाएं बताती हैं कि एक साहूकार के सात लड़के थे। एक दिन उसकी स्त्री खदाने में मिट्टी खोदने गई। जैसे ही उसने वहां कुदाली मारी तो सेही के बच्चे कुदाल की चोट से मर गए। उसने कुदाल को खून से सना देखा। इसके बाद वह बिना मिट्टी लिए ही दुख प्रकट करती हुई घर आ गई। उधर जब सेह अपनी घुरकाल में आई तो बच्चों को मरा देख विलाप करने लगी। भगवान से प्रार्थना की कि जिसने उसके बच्चों को मारा है उसे भी इसी प्रकार कष्ट होना चाहिए। सेह के श्राप के चलते सेठानी के सातों लड़के एक साल के भीतर ही काल के मुंह में समा गए। इससे आहत होकर उन्होंने किसी तीर्थ पर जाकर प्राण गंवाना उचित समझा। वह पैदल ही तीर्थ की ओर चल दिए। बाद में भगवान की कृपा से उन्हें संतान का सुख प्राप्त हुआ। सांय के समय महिलाओं ने तारों को अर्घ्य दिया और अपनी सास आदि का कपड़े आदि से सम्मान करके व्रत खोला। इसी परंपरा को हिंदु परिवारों की महिलाएं निभाती चली आ रही हैं।