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मुजफ्फरनगर: आरसी जारी होते ही निवर्तमान चेयरपर्सन ने जमा कराए 1.95 लाख रुपये

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वर्ष 2018-19 के ऑटो रिक्शा-टेंपो के ठेके के मामले में जारी की गई थी आरसी
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वित्तीय अनियमितता में ही अंजू अग्रवाल को चेयरपर्सन की कुर्सी गंवानी पड़ी थी

संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फरनगर। निवर्तमान चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल ने आरसी जारी होने के बाद तहसील में एक लाख 95 हजार 223 रुपये जमा कराए हैं। प्रमुख सचिव नगर विकास अमृत अभिजात ने शासकीय क्षति का यह पैसा जमा करने के आदेश दिए थे। वित्तीय अनियमितता में ही चेयरपर्सन को कुर्सी गंवानी पड़ी थी। कोर्ट से मिली राहत भी उनके कोई काम नहीं आ सकी।
वर्ष 2018-19 के ऑटो रिक्शा टेंपो के ठेके के मामले में शासकीय धन की क्षति को लेकर चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल की एक लाख 95 हजार 223 रुपये की आरसी 22 अगस्त 2022 को जारी की गई थी। उत्तर प्रदेश पालिका अधिनियम की धारा 48-2 (ख) के अंतर्गत शासकीय नुकसान को भू राजस्व की बकाया धनराशि की तरह वसूला गया। नगर विकास अनुभाग-दो के पत्र के बाद तत्कालीन डीएम चंद्रभूषण सिंह ने वसूली मांग पत्र जारी किया। इस प्रकरण में शासन के निर्देश पर तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट अतुल कुमार ने जांच की थी। डीएम ने जांच रिपोर्ट शासन को भेजी थी और शासन ने वसूली के आदेश दिए थे।
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ये था पूरा मामला
शिकायतकर्ता निवर्तमान सभासद राजीव शर्मा और जन विकास सोसाइटी के अध्यक्ष खालिद ने 21 जनवरी 2019 को शिकायत करते हुए कहा था कि वर्ष 2018-19 में ऑटो रिक्शा टेंपो शुल्क की वसूली के ठेके के लिए सार्वजनिक नीलामी 13 जून 208 को कराई गई थी। अधिकतम बोली एक लाख 40 हजार प्राप्त हुई, लेकिन पालिकाध्यक्ष ने बोली को उचित न मानते हुए दोबारा 10 जुलाई 2018 को नीलामी की सूचना का प्रकाशन समाचार पत्रों में कराया। इसके बावजूद नीलामी नहीं की गई। शिकायतकर्ताओं का कहना था कि पालिकाध्यक्ष ने 64 हजार 183 रुपये विज्ञापनों पर व्यय किया था। पालिका के कर्मचारियों ने सिर्फ आठ हजार 960 रुपये की वसूली की। इस तरह पालिका को कुल एक लाख 95 हजार 223 रुपये का नुकसान हुआ। शासन ने डीएम से मामले की जांच कराई तो आरोप सही पाए गए।
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जमा कराया गया धन : ईओ
नगर पालिका के ईओ हेमराज का कहना है कि पालिका ने जो आरसी जारी की थी, उसकी वसूली हो गई है। आरसी का एक लाख 95 हजार 223 रुपया जमा हो गया है।

प्रशासन के दबाव में जमा किया रुपया : अंजू
अंजू अग्रवाल का कहना है कि एक लाख 95 हजार का मामला कोर्ट में विचाराधीन है। इसके बाद भी आरसी जारी कर दी गई और लगातार दबाव बनाया गया। हमने यह कहते हुए कि कोर्ट के निर्णय के बाद हमारा पैसा वापिस करना होगा, यह रुपया जमा करा दिया है। जांच में हमें गलत तरीके से फंसाया गया है।
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