मुजफ्फरनगर। कथा व्यास सीताराम त्रिपाठी ने कहा कि जहां सत्य एवं भक्ति का समन्वय होता है, वहां भगवान का आगमन अवश्य होता है।
श्री मां शाकंभरी देवी सेवा समिति के तत्वावधान में आर्य कन्या पाठशाला में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में कथा व्यास सीताराम त्रिपाठी ने नंद उत्सव, गिरीराज पूजन एवं छप्पन भोग का महोत्सव का वर्णन किया। गोवर्धन पर्वत उठाने की कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि श्रीकृष्ण ने इंद्र के लिए हो रहे यज्ञ को बंद करा दिया और कहा कि जो व्यक्ति जैसा कर्म करता है, वैसा ही फल मिलता है। ऐसा होने के बाद इंद्र गुस्सा हो गए और भारी बारिश करना शुरू कर दिया। नंद गांव में इससे त्राहि-त्राहि मचने लगी तो भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी अंगुली पर गोवर्धन पर्वत को ही उठा लिया। नंद गांव के लोग सुरक्षित हो गए। इसके बाद से ही गोवर्धन पूजा का क्रम शुरू हुआ। गोवर्धन भगवान की पूजा सभी भक्तों को विधि विधान से कराई गई। इसके अलावा भगवान कृष्ण की बाल लीला, माखन चोर लीला का प्रसंग भी विस्तार पूर्वक समझाया। इस दौरान संजय सिंघल, अंकुर सिंघल, पंकज गोयल, अनिल कुमार, बोबी शर्मा, अंकित गर्ग, अजय मित्तल, अमित मित्तल, वैभव वर्मा, दीपक गोयल, राघव गर्ग, लवी सोनी, मयंक गर्ग, मोहित गोयल, मोनू ,पंकज तायल, तपन गर्ग, प्रिंस गर्ग, प्रियांशु गर्ग, राहुल बंसल, राजन सोनी, संदीप सिंघल, शिवम सोनी, शोभित सिंघल, विकास गुप्ता, विशाल कुमार शामिल रहे।