वीतराग स्वामी कल्याणदेव महाराज। फाइल फोटो
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वीतराग संत ने जब राष्ट्रपति को भेंट की थी बकरी
मुजफ्फरनगर, मोरना। तत्कालीन राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह 15 जनवरी, 1984 में वीतराग स्वामी कल्याणदेव के दर्शन को शुकदेव आश्रम आए थे। उन्होंने गौशाला का शिलान्यास किया। सभा के दौरान मंच के नीचे खड़ी बकरी देख राष्ट्रपति अचरज में पड़ गए। शिक्षा ऋषि ने सजी-धजी यह बकरी दूध पीने के लिए राष्ट्रपति को भेंट की थी। ज्ञानी ने कहा था कि स्वामी जी संत समाज की बेशकीमती धरोहर है। 26 नवंबर 1958 को कार्तिक गंगा मेले में देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने किसान सम्मेलन में वीतराग संत को उत्तर प्रदेश के गांधी कहा था। 20 जुलाई, 1959 को संत के सानिध्य में तत्कालीन राज्यपाल वीवी गिरी ने वन महोत्सव में सहभागिता की थी। तत्कालीन राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा ने शिक्षा ऋषि को पहला नंदा नैतिक पुरस्कार दिया था। उन्होंने स्वामी जी को राष्ट्रीय संत बताया था। गुरुकुल घासीपुरा में पधारे तत्कालीन रक्षा मंत्री बाबू जगजीवन राम के ग्रामीण अंचल में शिक्षा कार्यों के लिए स्वामी को रेडक्रॉस सोसायटी की ओर से एक जीप भेंट की थी। वर्ष 2000 में शुकतीर्थ आये तत्कालीन उप राष्ट्रपति भैरों सिंह शेखावत ने निष्काम संत से उनकी फटी-पुरानी जैकेट मांग ली थी। शेखावत ने कहा था कि स्वामी जी की फटी जैकेट में शिक्षा, देशभक्ति और धर्म मर्यादा के अनमोल रत्न भरे हैं।