- जिला चिकित्सालय में तो जंबो पैक बनाने की सुविधा ही नहीं
- मरीजों को मेरठ, गाजियाबाद और दिल्ली के लिए रेफर किया जा रहा
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संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फरनगर। डेंगू, वायरल और टायफाइड के बढ़ते प्रकोप के साथ-साथ अब जिले में प्लेटलेट्स बढ़ाने वाले जंबो पैक की किल्लत भी होने लगी है। जिला चिकित्सालय में तो जंबो पैक बनाने की सुविधा ही नहीं है। ऐसे में मरीजों को मेरठ, गाजियाबाद और दिल्ली के लिए रेफर किया जा रहा है।
डेंगू में घटती प्लेटलेट्स के बाद जंबो पैक के लिए लोगों को भटकना पड़ रहा है। जिले में केवल तीन जगह ही जंबो पैक की सुविधा है। जिनमें से एक दो जगह ही जंबो पैक बनाए जा रहे हैं। शहर स्थित दुर्गा ब्लड बैंक और एसडी ब्लड बैंक के अलावा बेगराजपुर मेडिकल में जंबो पैक की सुविधा है, लेकिन यहां जंबो पैक की किट पर्याप्त नहीं हैं। ऐसे में केवल दुर्गा और एसडी ब्लड बैंक पर ही जंबो पैक बनाए जा रहे हैं। उसके लिए मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। गंभीर हालत में मरीजों को मेरठ, गाजियाबाद और दिल्ली की ओर ही रुख करना पड़ रहा है।
जंबो पैक बनाने में लगता है एक घंटा
जिले में जंबो पैक की किल्लत इसलिए भी है, क्योंकि इन दिनों मरीजों की प्लेटलेट्स तेजी से घट रही हैं। कुछ मरीजों की दस हजार तक प्लेटलेट्स पहुंच रही हैं, जिसके बाद उन्हें जंबो पैक की जरूरत पड़ती है। एक जंबो पैक बनाने में ही पूरा एक घंटा या उससे अधिक लग जाता है। तीन जगह ही सुविधा होने के चलते यहां मरीजों को जंबो पैक के लिए भटकना पड़ रहा है।
जिला चिकित्सालय सहित निजी अस्पतालों में भारी भीड़
डेंगू, वायरल और टायफाइड का प्रकोप इस कदर बढ़ रहा है कि जिला चिकित्सालय सहित निजी अस्पतालों में भी बेड खाली नहीं है। आलम यह है कि एक-एक बेड़ पर दो-दो मरीजों को भर्ती करना पड़ रहा है। वहीं, कुछ निजी अस्पतालों में तो बैंच तक पर मरीजों को लेटाया गया है। किसी भी अस्पताल में बेड खाली नहीं है।
सितंबर से अब तक सौ से अधिक मरीज रेफर
जुलाई और अगस्त के बाद सितंबर माह से डेंगू से सबसे अधिक मरीज सामने आए थे। जिला चिकित्सालय में भर्ती हुए सौ से अधिक मरीजों को अब तक भर्ती किया जा चुका है। सितंबर माह से नौ अक्तूबर तक 106 बुखार से पीड़ित मरीजों को गंभीर हालत के चलते मेरठ के लिए रेफर किया गया है। मुख्य चिकित्सालय पुरुष के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राकेश कुमार ने बताया कि जिला अस्पताल में जंबो पैक की सुविधा नहीं है। जिस मरीज को जरूरत होती है, छोटे पैक जरूर दिए जाते हैं।