- समूह के साथ मिलकर पांच माह में बना दिए डेढ़ लाख दीपक
- साठ हजार से अधिक दीपकों की अभी भी एडवांस बुकिंग
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संवाद न्यूज एजेंसी
भोपा। गड़वाड़ा की गीता के समूह की ओर से बनाए गए दीपक वृंदावन के लोगों को खूब भा रहे हैं। गीता पिछले पांच माह में महिलाओं के साथ मिलकर डेढ़ लाख से भी अधिक दीपक बना चुकी हैं। सभी दीपकों की सप्लाई वृंदावन में की गई है। दीपावली पर साठ हजार से भी अधिक दीपकों की अभी भी मांग है, जिस पर वह काम कर रही हैं।
गांव निवासी गीता ने दस महिलाओं को जोड़कर एक समूह बनाया है। गीता का कहना है कि वह अपनी समूह की महिलाओं के साथ दीपावली के चलते दीपक बना रही हैं। पांच माह में वह डेढ़ लाख से भी अधिक दीपक बना चुकी हैं। दीपकों की खूबसूरती के चलते उनकी सप्लाई सीधे वृंदावन हो रही है। उनके दीपक वृंदावन वासियों को खूब भा रहे हैं। वह प्रतिदिन एक से दो घंटा दीपक बनाने का कार्य करती है। बाकी समय में घर का कार्य करती हैं। गीता बताती हैं कि अभी भी दीपावली त्योहार के मध्य नजर उसके दीपकों की खूब मांग है, जिसके चलते 60 से 70 हजार दीपकों की एडवांस में बुकिंग हो चुकी है। दीपकों की खूबसूरती के चलते उनके दीपकों की मांग लगातार बढ़ रही है।
गेरू, मुल्तानी, गत्ता से बनाती हैं दीपक
भारतीय स्वयं सहायता समूह की गीता बताती हैं कि उनके दीपक अन्य दीपकों से अलग हैं। वह दीपकों में मिट्टी का इस्तेमाल नहीं करती हैं, केवल गेरू, मुल्तानी और गत्ता से दीपक तैयार करती हैं। इन दीपकों को आग में तपाने की जरूरत नहीं पड़ती है। 100 रुपये प्रति सैकड़ा के हिसाब से दीपों की बिक्री होती है। जानसठ क्षेत्र के रहने वाले युवक के माध्यम से उन्हें सामग्री उपलब्ध कराई जाती है।
गत्ते के डब्बे भी कर रही हैं तैयार
गीता सहित समूह की महिलाएं गुड्डी, नीलू, राकेश, स्नेह लता, कमला, अंजू, मीनाक्षी, कमलेश आदि दीपकों के साथ-साथ दीपावली के मध्य नजर मिठाई के गत्ते वाले डब्बे भी तैयार कर रही हैं। पिछले दो सप्ताह में कड़ी मेहनत कर वह लगभग एक हजार डब्बे तैयार कर चुकी हैं। दो डब्बों (एक किलो व आधा किलो) की कीमत 13 रुपये के हिसाब से बाजार में सप्लाई कर रही हैं।
दक्ष प्रजापति समूह की महिलाएं भी बना रही हैं दीपक
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ककरौली के गांव खरपौड़ निवासी एक दर्जन से भी अधिक महिलाएं दक्ष प्रजापति समूह बनाकर दीपक बनाने का कार्य कर रही हैं। समूह की महिला सीमा देवी, निर्मला देवी ओमवती ने बताया कि वह दीपकों के साथ साथ मिट्टी से ही अलग-अलग डिजाइन की गुल्लक, घड़ा आदि सामान भी बनाती हैं। समूह को दुकान का आवंटन भी हुआ है। उसी के माध्यम से हस्त निर्मित मिट्टी के सामान की बिक्री करती हैं। दुकान से अलग बाहर भी सप्लाई करती हैं।