कसौली, नगलां राई और बुड्ढ़ाखेड़ा आदि गांवों में छोटी जोत के किसान कर्ज में डूब
संवाद न्यूज एजेंसी
चरथावल। हिंडन में आई बाढ़ ने किसान और मजदूरों के लिए संकट खड़ा कर दिया। ठेके पर जमीन लेकर सब्जी उत्पादन करने वाले किसान-मजदूरों पर दोहरी मार पड़ गई है। कसौली, नगलां राई और बुड्ढ़ाखेड़ा आदि गांवों में छोटी जोत के किसान कर्ज में डूब गए है।
कसौली के मांगा, जसबीर, बिजेंद्र, सुभाष और संजय ने करीब 25 बीघा जमीन ठेके पर लेकर लौकी का बीज लगाकर तारबंदी और बांस लगाने में लाखों रुपये खर्च किए थे। ग्राम प्रधान नंद कुमार कश्यप ने बताया गांव में नदी के पास करीब पांच से छह हजार रुपये बीघा ठेके का रेट है। प्रकृति की मार से कई लाख के कर्ज में डूब गए। उनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया।
बुड्ढ़ाखेड़ा के दो भाई रोहताश और संजय और रोहताश ने 15 15 बीघा जमीन 10 हजार रुपये प्रति बीघा पर ली थी। संजय की जमीन नदी किनारे थी। कर्ज पर दो लाख रुपये खीरे की फसल उत्पादन के लिए खर्च किए थे। उसकी पूरी फसल चौपट हो गई। सरकार से कब और कितना मुआवजा मिलेगा, इस पर निगाह टिकी है।
ठेके की जमीन में बैंगन की फसल चौपट
नगलां राई के कामिल ने आठ हजार रुपये प्रति बीघा जमीन ठेके पर लेकर बैंगन का बीज बोया था। 65 हजार उत्पादन लागत आई थी। पांच बीघा अपनी जमीन में धान बोया था। हिंडन नदी एक रात में दोनों फसलों को चौपट कर गई। राजस्व विभाग पानी कम होने पर सर्वे करने की बात कर रहा है।
सात बीघा लौकी की बेल सूख गई
कसौली के दिनेश ने सात बीघा जमीन को छह हजार रुपये बीघा पर लेकर बांसों का जाल बनाकर लौकी का बीज बोया था। फसल खराब हो गई। रोजाना चरथावल मंडी में बेचकर घर परिवार का खर्च चलता था। बच्चों की पढ़ाई भी इसी कमाई पर टिकी थी। उत्पादन लागत के लिए लिया कर्ज कैसे चुकाएंगे। यह चिंता है। देखना है कि शासन नुकसान की कितनी रकम तय करता है।
खेतों में बर्बाद ईख और चारा हो गया नष्ट
कसौली निवासी सूबेदार ध्यान सिंह का कहना है नदी किनारे से एक 15 बीघा का खेत में ईख और चारा खत्म हो गया। पूरे साल पशुओं को खिलाने के लिए बंदोबस्त करने की चिंता सता रही है। वहीं नगलां राई के मतलूब राई कहते है उनकी पांच बीघा गन्ने का खेत खराब हो गया। प्रशासन द्वारा मौके पर हुए नुकसान का पूरा मुआवजा दिलाए, तभी राहत मिल पाएगी।
श्मशान डूबने से अंतिम संस्कार करने में मुश्किल
चरथावल। परिवार में सदस्य के आकस्मिक निधन के बाद अंतिम संस्कार करने में दिक्कत आ रही है। श्मशान घाट डूबे पड़े है। मंगलवार को दूधली में बीमारी से सोनू की 10 साल की बेटी गोरी और रामबीर सैनी की मृत्यु हो गई। बुड्ढ़ाखेड़ा में स्वराज की मृत्यु हुई। दोनों गांवों में तीनों का अंतिम संस्कार खेतों में फसल कटवाकर करना पड़ा। इनके अलावा पिछले तीन दिनों में नदी के उफान के कारण छिमाऊ और दूधली में पीड़ितों द्वारा तीन अंतिम संस्कार में खेत में किए जा चुके है।