पेड़ का अंतिम संस्कार करती शालू सैनी।
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चार पीढ़ियों की बेशुमार यादें साथ लिए सेमल का 150 पुराना पेड़ रुखस्त हो गया। जमीन से सेमल की जड़ जरूर जुदा हुई, लेकिन जाते-जाते भी वह समाज के लिए समर्पण, संस्कार और इंसानियत का नया बीज बो गया है। लावारिस शवों का अंतिम संस्कार करने वाली शालू सैनी ने सेमल के पेड़ का तर्पण करने का बीड़ा उठाया। बेलड़ा से पेड़ की लकड़ियां लाकर हिंदू रीति से नई मंडी श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार किया। अब पितृ विसर्जनी अमावस्या यानी दो अक्तूबर को अन्य आत्माओं के साथ विधि-विधान से पेड़ के मोक्ष के लिए हवन में आहुति डालेंगी।
वेद-पुराणों में पेड़ों का आध्यात्मिक महत्व विस्तार से है, लेकिन विज्ञान भी पुष्टि कर चुका है कि पेड़ भी हमारी तरह सांस लेते हैं। महसूस करते हैं। फलते-फूलते हैं। बेलड़ा गंगनहर पटरी पर 150 साल पुराना सेमल का पेड़ बुधवार सुबह गिर गया था। भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने आने वाली पीढ़ियों के लिए पेड़ को संग्रहित करने की मांग की थी।
शुक्रवार को समाजसेवी शालू सैनी पेड़ की कुछ लकड़ियां बीनकर नई मंडी श्मशान घाट पहुंची सेमल का अंतिम संस्कार किया। वह बताती हैं कि पुराने पेड़ के गिरने से ऐसा लगा कि जैसे घर के किसी बुजुर्ग ने आखिरी सांस ली हो, तभी ठान लिया कि सम्मान के साथ धरोहर का तर्पण करना है।