पेड़ का अंतिम संस्कार करती शालू सैनी।
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चार पीढ़ियों की बेशुमार यादें साथ लिए सेमल का 150 पुराना पेड़ रुखस्त हो गया। जमीन से सेमल की जड़ जरूर जुदा हुई, लेकिन जाते-जाते भी वह समाज के लिए समर्पण, संस्कार और इंसानियत का नया बीज बो गया है। लावारिस शवों का अंतिम संस्कार करने वाली शालू सैनी ने सेमल के पेड़ का तर्पण करने का बीड़ा उठाया। बेलड़ा से पेड़ की लकड़ियां लाकर हिंदू रीति से नई मंडी श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार किया। अब पितृ विसर्जनी अमावस्या यानी दो अक्तूबर को अन्य आत्माओं के साथ विधि-विधान से पेड़ के मोक्ष के लिए हवन में आहुति डालेंगी।