संवाद न्यूज एजेंसी
शाहपुर। गांव गोयला का सिद्धपीठ बारह वाला शिव मंदिर श्रद्धालुओं की श्रद्धा और आस्था का केंद्र है। मान्यता है कि जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से मंदिर में आकर दीपक जलाने के साथ भगवान शिव का जलाभिषेक कर पूजा अर्चना करता है, उसकी मनोकामना पूर्ण होती है ।
मंदिर समिति के ऋषि पाल सिंह चेयरमैन ने बताया कि मंदिर की स्थापना विक्रम संवत 1751 में हुई थी। जब ग्रामीण पानी के लिए कुएं का निर्माण कर रहे थे तब खुदाई में सफेद रंग का शिवलिंग दिखाई दिया। ग्रामीणों ने शिवलिंग निकालकर कुएं के पास ही स्थापित कर मंदिर का निर्माण कराया। उन्होंने बताया कि जिस भूमि पर मंदिर का निर्माण हुआ, वह भूमि 12 बीघे थी। इसके चलते यह शिव मंदिर बारह वाला मंदिर के नाम से प्रसिद्ध हुआ। उस समय गांव के अलावा सोरम, शाहजुड्डी और कितास गांव के ग्रामीण मंदिर में आकर पूजा अर्चना करते थे। इस सिद्धपीठ के परिसर में मां शेरोंवाली, संकट मोचन हनुमान जी, राधा कृष्ण, सीताराम के अलावा शनिदेव के मंदिर स्थापित है। इसके अलावा हवन के लिए एक यज्ञशाला का निर्माण भी कराया गया है ।
मंदिर समिति के अध्यक्ष हरिकिशन सिंह और ब्रजवीर सिंह ने बताया कि मंदिर में ग्रामीणों के सहयोग से निर्माण कार्य चलता रहता है। सदस्य सुमन बालियान ने बताया कि मंदिर समिति की ओर से 14 जुलाई को प्रांगण में विशाल भंडारा आयोजित किया जाएगा।