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गांव खड़ा रहा, मिट्टी हटती गई और रिश्ता दरकता गया

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मुजफ्फरनगर ::::::::भौराकला के हड़ौली गांव में जेसीबी से गड्ढा खोदवाती पुलिस और मौजूद ग्रामीण। - फोटो : MUZAFFARNAGAR
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कंवरपाल हत्याकांड
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- हड़ौली गांव में किसान के दो बेटों ने ही कर दिया रिश्तों का खून
- सैकड़ों ग्रामीणों की मौजूदगी में दोनों ने बरामद कराई लाश
संवाद न्यूज एजेंसी
भौराकलां (मुजफ्फरनगर)। जिन बेटों को नाजों से पाला था, उन्हीं बेटों ने रिश्तों का खून कर दिया। दोनों ने पिता की हत्या करने की बात स्वीकार की तो पुलिस घटनास्थल पर लेकर पहुंची। खेत से बाजरा कटवाया गया। जेसीबी से मिट्टी की खोदाई शुरू हुई। सैकड़ों ग्रामीणों की मौजूदगी में किसान की लाश निकली तो भरोसा बिखर गया। आरोपी अपने ही बुने जाल में फंस गए थे।
पारिवारिक चाचा से लंबे समय से झगड़ा चला आ रहा था। दोनों परिवारों में मनमुटाव था, लेकिन किसी ने इस तरह की वारदात की कल्पना तक भी नहीं की होगी। किसान के दोनों बेटे लंबे समय से वारदात का ताना-बाना बुन रह थे। दोनों पिता को खेत में ले गए और इसके बाद नापाक मंसूबों को अंजाम दिया। शक होने पर पुलिस दोनों को बृहस्पतिवार रात खेत में लेकर पहुंची तो घटनास्थल दिखाया। इसके बाद शुक्रवार सुबह पुलिस दोबारा दोनों को लेकर मौके पर पहुंची। गांव के सैकड़ों लोग एकत्र हो गए। किसी को अंदाजा तक नहीं था कि सीधे-साधे दिखने वाले दोनों युवकों ने खतरनाक साजिश रची है। मिट्टी उठी तो वारदात का सच खुलकर सबके सामने आ गया।
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अधिकारियों से पुलिस की कर रहे थे शिकायत
पिता की गुमशुदगी दर्ज होने के बाद दोनों लगातार पुलिस अधिकारियों से शिकायत कर रहे थे। दोनों का कहना था कि स्थानीय पुलिस लापरवाही बरत रही है। जिन लोगों पर पुलिस को शक है, उनसे भी पूछताछ नहीं की जा रही है। मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी शिकायत की गई थी।
पिता की मौत, बेटे जेल में, बिखरा घर
किसान कंवरपाल की हत्या के मामले में उसके दोनों बेटे जेल में चले गए। इससे परिवार पूरी तरह बिखर गया।
यह लिखवाई गई थी गुमशुदगी
आरोपियों ने लिखवाया था कि उनके पिता 28 जून को दिशा शौच के लिए खेत में गए हैं, तभी से उनका सुराग नहीं लग रहा है। पुलिस से बरामदगी की मांग करते आ रहे थे।
कब क्या हुआ
किसान कंवरपाल 28 जून को लापता हुआ था। उसके बेटे विकास उर्फ विक्की और उपेंद्र ने एक अगस्त को गुमशुदगी दर्ज कराई। पुलिस ने 11 अगस्त को दोनों से पूछताछ की और रात के समय मौके पर लेकर पहुंची। 12 अगस्त को दोनों ने शव बरामद कराया। सीओ फुगाना शरद चंद्र जोशी ने बताया कि शव बरामद होते ही दोनों भाइयों को गिरफ्तार कर लिया गया है। दोनों का चालान कर दिया है।
तीन दिन तक करते रहे निगरानी
वारदात के बाद दोनों भाई तीन दिन तक निगरानी करते रहे। दोनों भाई पूरी तरह आश्वस्त थे कि उनकेे खेत तक कोई नहीं पहुंचेगा, लेकिन फिर भी उन्होंने तीन दिन तक खेत पर जाकर निगरानी की। खेत में कोई गड्ढा देख भी ले तो कोई पूछ न सके, इसलिए गड्ढे पर बाजरे की फसल बो दी गई।
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चप्पल कब्जे में ली
थाना प्रभारी नवीन भाटी ने बताया कि मृतक की चप्पल, गड्ढे से मिली बोरी व दरी कब्जे में ली है। शव का अधिकांश हिस्सा कंकाल बन चुका था। कपड़े गल चुके थे।
हत्या की धारा में मुकदमा तरमीम
पुलिस ने पहले यह मामला गुमशुदगी की धारा में दर्ज किया था। मगर, शव बरामद होने पर दोनों भाइयों के खिलाफ हत्या कर शव छिपाने की धारा का मुकदमा दर्ज किया गया है।
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