बुढ़ाना। श्री दिगंबर जैन मंदिर अटाली में जैन समाज के श्रद्धालुओं ने दशलक्षण महापर्व का तीसरा दिन उत्तम आर्जव धर्म के रूप में मनाया। मंदिर में विधि-विधान से अभिषेक एवं शांति धारा का आयोजन हुआ। शांति धारा के पुण्य अर्जक अंजय जैन व संजय जैन निवासी दिल्ली को प्राप्त हुआ। श्रद्धालुओं ने दस लक्षण महामंडल विधान किया। महामंडल विधान पर श्रद्धालुओं ने अर्घ चढ़ाये। विधानाचार्य पंडित मनोज जैन ने उत्तम आर्जव धर्म पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि माया कषाय के अभाव का नाम ही उत्तम आर्जव धर्म है। जहां पर मन, वचन, काय से छल कपट कुटिलता परिणाम का त्याग कर दिया जाए वहां आर्जव धर्म प्रकट होता है। जो व्यक्ति दूसरों के साथ छल कपट करता है वह स्वयं ही अपने आप को धोखा देता है। राकेश जैन, प्रमोद जैन, संजय जैन, राजीव जैन, शिवानी जैन, शुभम जैन, अदिति, जैन आदि सहित दर्जनों जैन समाज के श्रद्धालु मौजूद रहे।