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Muzaffarnagar News: वीतराग संत के संकल्प से हुआ शुकतीर्थ का उदय

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भागवत पीठ श्री शुकदेव आश्रम में 14 जुलाई को वीतराग संत की 19वीं पुण्यतिथि मनाई जाएगी
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स्वामी कल्याणदेव ने वर्ष 1944 में प्रारंभ किया था जीर्णोद्धार

संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फरनगर। तीर्थ मानचित्र पर शुकतीर्थ का उदय वीतराग स्वामी कल्याणदेव का दृढ़ संकल्प से हुआ। भागवत की उद्गम स्थली को उन्होंने धर्म और संस्कृति का मुख्य केंद्र बनाया। देशभर के कथा व्यास महामुनि शुकदेव की इस तपोभूमि पर कथा की अमृत वर्षा से जहां धन्य होना चाहते है, वहीं श्रद्धालु भी कथा श्रवण का पुण्य कमाते है।

संत विभूति स्वामी कल्याणदेव का व्यक्तित्व अतुल्य और विराट था। भागवत पीठ श्री शुकदेव आश्रम में 14 जुलाई को वीतराग संत की 19वीं पुण्यतिथि मनाई जाएगी। महाभारत के बाद शुकतीर्थ उपेक्षित और जीर्ण-शीर्ण हो गया था। प्रयाग कुंभ में देश के बड़े सन्तों ने स्वामी कल्याणदेव से आग्रह किया कि शुकतीर्थ का जीर्णोद्धार कराये। वर्ष 1944 में स्वामी जी यहां पधारे और अपने पुरुषार्थ और त्याग से शुकतीर्थ को जनसुलभ बनाने में जुट गए।
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उन्होंने पंडित मदन मोहन मालवीय के सहयोग से अक्षय वट के नीचे एक साल तक अखंड श्रीमद्भागवत पाठ कराया। काशी और वृंदावन से बड़े विद्वान आमंत्रित किए थे। धीरे-धीरे दानवीर तथा भक्त जुड़ने लगे। वीतराग संत ने श्री शुकदेव आश्रम सेवा समिति बनाई। 18 नवंबर, 1945 को श्री शुकदेव मंदिर का भूमि पूजन महाराजा सवाई अलवर नरेश सर तेज बहादुर ने किया था।
मंदिर शिलान्यास के लिए तीन अक्टूबर, 1948 को तत्कालीन केंद्रीय ऊर्जा एवं माईन्स मंत्री एनवी गाडगिल शुकतीर्थ पधारे। 27 अप्रैल, 1956 को स्वामी अखण्डानन्द वृंदावन के सानिध्य में मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा धर्म परायण गुलजारी लाल नन्दा ने की, जो उस वक्त केंद्रीय गृहमंत्री थे।
स्वामी कल्याणदेव का दीर्घायु जीवन शुकतीर्थ के उत्थान को समर्पित रहा। उन्होंने तीर्थ में कार्तिक पूर्णिमा और गंगा दशहरा सहित मुख्य पर्वों पर गंगास्नान और मेलों का प्रारंभ किया। वर्तमान में मेलों का प्रबंधन जिला पंचायत करती है। स्वामी जी ने तीर्थ में अन्य धाम, शिवालय, धार्मिक केंद्र स्थापित कराने में सहयोग किया। संत के अथक प्रयास से यह तीर्थ देश का मुख्य आध्यात्मिक केंद्र बन चुका है।
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गुरुदेव स्वामी कल्याणदेव महाराज ने अपने विलक्षण पुरुषार्थ से मोक्षदायी शुकतीर्थ को धर्म की महिमा और गरिमा का पावन धाम बना दिया है। सनातन संस्कृति के उपासक यहां परम शांति का अनुभव करते है। भागवत कथा सप्ताह यज्ञ के लिए दूरस्थ प्रान्तों से लाखों श्रद्धालु धार्मिक नगरी पधारते है। तेलगू, तमिल, कन्नड़, मराठी, मलयालम आदि भाषाओं में शुकतीर्थ का साहित्य प्रकाशित हो चुका है। 14 जुलाई को ब्रह्मलीन संत की पुण्यतिथि श्रद्धा और भक्ति से मनाएंगे। - स्वामी ओमानन्द, पीठाधीश्वर, भागवत पीठ श्री शुकदेव आश्रम, शुकतीर्थ।
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