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Muzaffarnagar News: मुजफ्फरनगर - 20 तारीख और 40 दिन में कानून ने किया इंसाफ

Wed, 22 Nov 2023 01:09 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मुजफ्फरनगर
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- अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए नौ गवाह
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- सुनवाई के दौरान पीड़ित पक्ष के लोग भी पहुंचे

फोटो समेत
अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। बुढ़ाना के मदरसे में हाफिज ने मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म की वारदात अंजाम देकर समाज के भरोसे को तार-तार कर दिया। लेकिन कानून ने सिर्फ 40 दिन और 20 तारीख में ही इंसाफ कर हाफिज को सबक सिखाया है। अभियोजन के साथ पुलिस-प्रशासन की संवेदनशीलता के चलते प्रकरण का निस्तारण सिर्फ 40 दिन में संभव हो सका।
पीड़िता 23 सितंबर को तालीम हासिल करने के लिए बुढ़ाना क्षेत्र के मदरसे में पहुंची थी, लेकिन यहां पढ़ा रहे बवाना गांव के हाफिज इरफान ने घिनौना कृत्य किया। बच्ची को झाड़ू लगाने के बहाने कमरे में बुलाया और दुष्कर्म किया। हाफिज की करतूत से मासूम हैरान थी। घर पहुंचकर अपनी मां और अन्य परिजनों को वारदात की जानकारी दी। परिजनों ने थाने में मुकदमा दर्ज कराया।
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विशेष लोक अभियोजक मनमोहन वर्मा और दिनेश कुमार शर्मा ने बताया कि पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर 11 अक्तूबर को आरोप पत्र दाखिल कर दिया गया था। 13 अक्तूबर से सुनवाई शुरू हुई और 40 दिन तक चले ट्रायल में कुल 20 तिथियों पर सुनवाई हुई। अदालत ने पीड़िता के साथ इंसाफ कर दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

संयुक्त निदेशक ने दर्ज कराए थे बयान
अभियोजन पक्ष की ओर से कुल नौ गवाह पेश किए गए। इनमें विधि विज्ञान प्रयोगशाला रेवाड़ी के संयुक्त निदेशक डॉ. राजेंद्र सिंह के बयान भी महत्वपूर्ण रहे। पीड़िता के बयान भी दर्ज कराए गए। कचहरी में सुनवाई के दौरान लोगों के बीच दुष्कर्मी को लेकर गुस्सा नजर आया। सजा सुनाए जाने के बाद पुलिस दोषी को जिला कारागार ले गई। इस दौरान दोषी इरफान के चेहरे पर पछतावे तक के भाव नजर नहीं आए।

बुजुर्ग शिक्षकों को भी सुनाई गई थी सजा
विशेष पॉक्सो कोर्ट ने शहर के स्कूल में मासूम बच्ची से गैंगरेप के मामले में दोषी दो शिक्षकों को 20-20 साल कारावास की सजा सुनाई थी। एक शिक्षक ने बालिका के साथ स्कूल में गलत हरकत की, जबकि दूसरे शिक्षक ने पूरे मामले को दबाने का प्रयास किया था।
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दरिंदे को जीने का हक नहीं, फांसी पर लटकाया जाए
बुढ़ाना। पीड़िता के परिवार ने कहा कि अदालत ने इंसाफ किया। फांसी की सजा सुनाई जाती तो और अभी अच्छा होता। ऐसे दरिंदे को समाज में रहने और जीने का कोई हक नहीं है। सुनवाई के दौरान पीड़ित परिवार के लोग भी अदालत पहुंचे। उनका कहना था कि अदालत ने इंसाफ कर दिया है। वह चाहते थे कि दोषी को फांसी की सजा होनी चाहिए। मां-बाप बच्चे को शिक्षकों के भरोसे ही स्कूल भेजते हैं, अगर बच्चों के साथ ऐसा किया जाएगा तो समाज कैसे सहन करेगा। तेजी से मामले का निस्तारण किया, अदालत के इंसाफ से संतुष्ट हैंं। इस तरह के शिक्षकों को जितनी सजा दी जाए वह कम है। संवाद
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