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45 मिनट तक मलबे में सिसकता रहा परिवार

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मिमलाना में मकान की गिरी छत देखते लोग। - फोटो : MUZAFFARNAGAR
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- हादसे के एक घंटे बाद अस्पताल पहुंचे घायल
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- पड़ोसी के शोर पर एकत्र लोगों ने मलबे से बाहर निकाला
संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फरनगर। मिमलाना में मकान की छत गिरने से लोहे के गर्डर के नीचे दबा परिवार मदद के लिए 45 मिनट तक तड़पता रहा। घायल हादसे के एक घंटे बाद जिला अस्पताल पहुंच पाए। घटना स्थल की अस्पताल से दूरी मात्र पांच मिनट की है। उपचार में देरी से इस बीच दो बच्चों की मौत हो गई।
मिमलाना गांव को शहर का हिस्सा ही कहा जा सकता है। यह शहर के रामलीला टिल्ला से सटा हुआ है। इस गांव में अभी भी बहुत से ऐसे घर हैं, जिनकी छत कच्ची है। रात में लगभग एक बजकर 55 मिनट पर इस गांव के आस मोहम्मद के मकान की छत गिरने से बड़ा हादसा हो गया। बारिश के शोर में परिवार के घायलों की चीख पुकार पड़ोसियों को सुनाई नहीं दी। आस मोहम्मद के शोर मचाने पर पड़ोसी नियाजुद्दीन घर से बाहर निकला और मकान को गिरा देख सहम गया। उसने आस-पास के घरों का दरवाजा पीटा। कुछ लोग एकत्र हुए तो मलबा गिरने के बाद बंद गेट से अंदर जाने की जगह नहीं मिल पाई। घर में कितने लोग दबे हैं, यह भी किसी को नहीं पता था। शोर मचता गया लोग एकत्र होते गए।
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लगभग दो बजकर 40 मिनट पर गेट तोड़ा गया और मलबे में दबे लोगों को एक-एक कर बाहर निकाला गया। परिवार के छह बच्चे और आस मोहम्मद और उसकी पत्नी इसमें दबे थे। इस बीच किसी ने एसडीएम सदर को सूचना दी, उनकी सूचना पर एंबुलेंस मौके पर पहुंची। कोतवाली पुलिस को लेकर एसडीएम सदर परमानंद झा दो बजकर 45 मिनट मौके पर पहुंच गए। नागरिकों की मदद से घायलों को एंबुलेंस से एक बजकर 55 मिनट पर अस्पताल पहुंचाया। हादसे को तब तक इतनी देर हो चुकी थी कि दो बच्चों 11 साल की शना और 16 साल के शोएब की मौत हो चुकी थी। मोहल्ले के नियाजुदीन का कहना है कि यदि लोग जल्दी जाग जाते और मलबा हटने में देरी नहीं होती तो इन बच्चों की जान भी बचाई जा सकती थी।
घर में रखा सबकुछ नष्ट हो गया
मिमलाना के आस मोहम्मद के परिवार के पास एक ही कमरा था, इसी में पूरे परिवार का जीवन चल रहा था। घर की रसोई से लेकर भोजन सामग्री, बर्तन, कपड़े सब इसी में रखा था। मकान गिरने से सब नष्ट हो गया।
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100-100 रुपये चंदा कर सुपुर्द ए खाक किया
गरीबी जीवन का सबसे बड़ा अभिशाप है। गरीबी में पक्का मकान नहीं बना पाने से भट्टा मजदूर आस मोहम्मद के दो बच्चो की कच्चा मकान गिरने से मौत हो गई। आस मोहम्मद के परिवार के बाकी सदस्य घायल अवस्था में अस्पताल में है। ऐसे हालात में दोनो मृतक बच्चों शना और शोएब को सुपुर्दए खाक करने के लिए गांव के लोगों ने चंदा एकत्र किया। आस-पास में सब मजदूर वर्ग के लोग रहते हैं। इस कारण 100-100 रुपये का चंदा एकत्र किया। पड़ोसी रियाज ने बताया कि चंदा एकत्र होने के बाद ग्रामीणों ने दोनो के शव को सुपुर्द ए खाक किया गया।
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