पहली बार नवनियुक्त चेयरमैन को नहीं मिलेगी घाटे की पालिका
संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फरनगर। शहर में पहली बार सीमा विस्तार के बाद निर्वाचित होने वाली नई चेयरपर्सन को पालिका में भरपूर खजाना मिलने जा रहा है। 13 मई के बाद जो भी चेयरपर्सन बनेंगी, शुरूआत में उसे धन की कोई कमी नहीं रहेगी। उन्हें करीब सौ करोड़ रुपये के खजाने की चाबी मिलेगी।
नगर पालिका मुजफ्फरनगर के इतिहास की बात करें तो बोर्ड का कार्यकाल पूर्ण होते होते पालिका का खजाना शून्य होता रहा है। भले ही अपने कार्यकाल में पुराने बोर्ड अध्यक्षों ने कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी, लेकिन नए निर्वाचित होने वाले बोर्ड को पालिका का खजाना खाली ही मिला है। वर्ष 1995 से पहले सभासद ही चेयरमैन का चुनाव करते थे। 1995 में पहली बार जनता ने अपना चेयरमैन चुना था। पहले चेयरमैन और पहले भाजपाई अध्यक्ष डॉ सुभाष चन्द शर्मा को जब कुर्सी सौंपी गई तो पालिका पांच करोड़ रुपये के कर्ज में डूबी थी। कर्मचारियों को कई कई माह तक वेतन ही नहीं मिल पा रहा था।
इनके बाद चेयरमैन बने जगदीश भाटिया को भी पालिका कर्ज में मिली तो भाजपा के तीसरे चेरयमैन कपिल देव अग्रवाल को भी खजाना खाली ही मिला। पंकज अग्रवाल चेयरमैन बने और कांग्रेस राज स्थापित हुआ। पंकज अग्रवाल के सामने भी पालिका की देनदारी को दूर कर लाभ में पहुंचाने की चुनौती रही। कांग्रेस की दूसरी चेयरमैन के रूप में अंजू अग्रवाल ने कार्यभार संभाला तो पालिका के हालात कर्जदारी के ही थे।
इसी दौरान अंजू भाजपा में शामिल हो गई। उनके कार्यकाल में पालिका की आय में वृद्धि हुई। अब आने वाली नई पालिका चेयरपर्सन को खजाना खाली नहीं बल्कि लबालब भरा मिलेगा। उन्हें करीब सौ करोड़ रुपये के खजाने की चाबी मिलेगी। यह पहली बार है कि पालिका में निर्वाचित नये बोर्ड को विकास कार्यों के लिए आर्थिक संकट का सामना नहीं करना पड़ेगा।