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मिड-डे मील वितरण करने वाली एनजीओ का टेंडर होगा निरस्त

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नगर के खालापार के परिषदीय स्कूल के बहार पडी रोटी। - फोटो : MUZAFFARNAGAR
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- बीएसए ने नगर शिक्षा अधिकारी को दी जांच, भुगतान रोकने के आदेश
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- विभाग के दो नोटिस जारी किए जाने के बाद भी हालत नहीं सुधरी
संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फरनगर। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी शुभम शुक्ला ने नगर क्षेत्र में मिड-डे मील वितरण करने वाली एनजीओ का टेंडर निरस्त करने की कार्रवाई शुरू कर दी है। नगर शिक्षा अधिकारी ज्योति प्रकाश तिवारी को एनजीओ का भुगतान रोकने के साथ ही पूरे मामले की जांच के आदेश दिए गए है। उधर, दो नोटिस जारी किए जाने के बाद भी एनजीओ ने मिड-डे मील की गुणवत्ता में सुधार नहीं किया है। शुक्रवार को भी कई स्कूलों में खराब गुणवत्ता का भोजन भेजा गया।
मुजफ्फरनगर नगर क्षेत्र में एनजीओ श्रीबालाजी सामाजिक विकास समिति मेरठ के माध्यम से मिड-डे मील का वितरण किया जा रहा है। इस सत्र में 15 जून से नगरीय क्षेत्र में प्रतिदिन 10 से 12 हजार बच्चों को मिड-डे मिल का वितरण किया जा रहा है। पहले दिन ही शिक्षकों ने मिड-डे मील की खराब गुणवत्ता की शिकायत की थी। खराब चावलों की ताहरी अधिकतम स्कूलों में फेंकी गई थी। लगातार शिकायतों के चलते एनजीओ को बीएसए की ओर से दो नोटिस जारी हो चुके हैं। बृहस्पतिवार को बीएसए शुभम शुक्ला को निरीक्षण में मिड-डे मील की गुणवत्ता खराब मिली थी। स्कूलों में भेजी गई बदबूदार रोटियों को फेंका गया था। बीएसए ने बताया कि एनजीओ को अंतिम नोटिस जारी किया जा रहा है। इस एनजीओ का टेंडर निरस्त कर किसी अन्य एनजीओ को यह कार्य दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि एनजीओ का भुगतान रोकने के आदेश दे दिए गए हैं। नगर शिक्षा अधिकारी ज्योति प्रकाश तिवारी को पूरे मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं।
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रिजेक्ट चावल, आटे का कर रहे प्रयोग
मुजफ्फरनगर। मिड-डे मील वितरण करने वाली एनजीओ बाजार के रिजेक्ट गेहूं और चावल का प्रयोग कर रही है। गेहूं की रोटियों में बदबू आती है। बीएसए के निरीक्षण में सब सामने आया है। ताहरी की हालत यह है कि बच्चे चखकर एक तरफ रख देते हैं। शुक्रवार को आई ताहरी भी बेस्वाद रही। अधिकतम बच्चों ने भोजन नहीं किया।
स्कूलों के बाहर मिली रोटियां
बृहस्पतिवार को मिड-डे मिल की रोटी जैसे ही बच्चों ने चखी तो उसमें बदबू को सहन नहीं कर पाए। बच्चों ने अपने सामने आई रोटियां स्कूल के बाहर एक स्थान पर एकत्र कर दी। कमाल की बात यह है कि रोटियों में इतनी बदबू थी कि बेसहारा पशुओं ने भी यह नहीं खाई।
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अमर उजाला ने खोली थी मिड-डे मील की खराब गुणवत्ता की पोल
मुजफ्फरनगर। नए शैक्षिक सत्र में स्कूलों में भेजे जा रहे मिड-डे मील की खराब गुणवत्ता की पोल अमर उजाला ने 22 जून के संस्करण में खोली थी। बृहस्पतिवार यानि 04 अगस्त को बीएसए शुभम शुक्ला के निरीक्षण में सामने आई खामियां को भी प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसके अलावा 13 जुलाई को सदर ब्लॉक के बीबीपुर स्कूल के मिड-डे मील में भी छिपकली गिरने का आरोप लगाया गया था। 30 छात्र-छात्राओं को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। अमर उजाला की इस मुहिम का असर यह हुआ कि प्रशासन ने स्कूली बच्चों की सेहत से खिलवाड़ करने वाले एनजीओ पर कार्रवाई करनी शुरू कर दी है।
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