मुजफ्फरनगर। 16 साल पुराने सांप्रदायिक झगड़े के मामले में अदालत ने दस दोषियों को पांच-पांच साल की सजा सुनाई है। भाजपा नेता बिजेंद्र पाल समेत समेत 14 आरोपियों को दोषमुक्त करार दिया। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या- तीन अनिल कुमार ने फैसला सुनाया।
डीजीसी फौजदारी राजीव शर्मा और एडीजीसी कमल कुमार ने बताया फरवरी 2006 में मुजफ्फरनगर शहर के इस्लामिया इंटर कॉलेज में डेनमार्क में पैगंबर साहब के कार्टून को लेकर जलसा हुआ था। वापस लौटते वक्त प्रदर्शनकारियों के साथ दूसरे वर्ग के लोगों का कच्ची सड़क पर झगड़ा हो गया। तत्कालीन थानाध्यक्ष सुनील त्यागी ने दोनों वर्गों के 24 लोगों के खिलाफ सिविल लाइन थाने में मुकदमा कायम कराया था। दूसरा मुकदमा इरफान की ओर से दर्ज कराया। पुलिस ने दोनों मुकदमों की एक साथ जांच की और आरोप पत्र दाखिल किया।
अभियोजन पक्ष की ओर से कोर्ट में सात गवाह पेश किए। झगड़े में पुलिस पार्टी पर गोली चलाई गई थी। जिसमें सिपाही पंकज घायल हुआ था। ट्रायल के दौरान वादी इरफान पक्षद्रोही हो गया था। साक्ष्यों के अभाव में अदालत द्वारा भाजपा नेता एवं पूर्व सभासद बिजेंद्र पाल उर्फ पहलवान, प्रमोद पाल, इरफान, बबलू, रामानुज दुबे, गुलशन, इंद्र ठेकेदार, मंगू, अनीस, मोमीन, नफीस, सालिम, अनिल और रमेश को दोषमुक्त कर दिया।
जबकि दोष सिद्ध किए गए नसीम, कलीम, नासिर, इरफान, रियाज, इकबाल और नदीम, दिलशाद, गुड्डू और साबिर को पांच-पांच साल की सजा सुनाई गई। अन्य धाराओं में अलग कारावास की सजा सुनाई गई। सभी सजा एक साथ चलेगी। दोषियों पर विभिन्न धाराओं में 34 हजार के अर्थदंड की सजा सुनाई गई।