मुजफ्फरनगर। लाल सड़न रोग से घिरी गन्ना प्रजापति 0238 अभी भी जिले के किसानों की पहली पसंद है। प्रजाति की औसत आयु 12 साल से अधिक हो जाने के बावजूद किसानों की यह पहली पसंद है, इसकी वजह बेहद उत्पादन और अच्छा अगोला है। एक लाख 77 हजार हेक्टेयर में से एक लाख 29 हजार हेक्टेयर में अकेले यही प्रजाति है। तीन साल से गन्ना विभाग और गन्ना वैज्ञानिक यह प्रयास कर रहे हैं कि किसान 0238 को छोड़कर इसके विकल्प के तौर पर नई प्रजातियों का प्रयोग करें। पूरे प्रदेश में यह प्रजाति बीमार हो चुकी है।
गन्ना विभाग ने हाल ही गन्ने का सर्वे कराया है। गन्ने की प्रजाति 0238 ने किसानों की गन्ने की पैदावार दोगुनी की है। इस प्रजाति की चीनी की रिकवरी भी अधिक है। किसानों को इससे ऐसा मोह हुआ है कि वह छोडने को तैयार नहीं है। जनपद के 75 प्रतिशत किसान इसी की खेती कर रहे हैं। विभाग के सर्वे के अनुसार जनपद में एक लाख 77 हेक्टेयर में गन्ने की खेती हो रही है, इसमें से एक लाख 29 हजार हेक्टेयर में 0238 की पैदावार है। लगभग 75 प्रतिशत में यही प्रजाति है।
जिले में गन्ने की इन प्रजाति की हो रही खेती
गन्ना विभाग के सर्वे में इस बार किसानों ने एक लाख 29 हजार हेक्टेयर में 0238 की पैदावार की है। गत वर्ष एक लाख 56 हजार हेक्टेयर में 0238 की पैदावार हुई थी। केवल 27 हजार हेक्टेयर का रकबा ही घटा है। इसके बाद जिले में 0118 की खेती हो रही है। 31 हजार हेक्टेयर में किसानों ने इसे लगाया है। पिछले साल 12 हजार हेक्टेयर में इसकी खेती हुई थी। गन्ना प्रजाति 13235 इस बार 6200 हेक्टेयर में है। गत वर्ष यह 800 हेक्टेयर में थी। 15023 इस वर्ष 3900 हेक्टेयर में है। गत वर्ष यह 2700 हेक्टेयर में थी। 98014 इस बार 2897 हेक्टेयर में है, गत वर्ष यह 1232 हेक्टेयर में थी।
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किसानों को सावधान रहने की आवश्यकता
जिला गन्ना अधिकारी संजय सिसौदिया का कहना है कि 0238 में पूरे प्रदेश में रोग फैल गया है। इस कारण विभाग इसके विकल्प के रुप में दूसरी प्रजातियों की खेती पर जोर दे रहा है। यहां के किसान दवाई आदि से रोक को कम किए हुए है। इससे पहले की यहां रोग अधिक बढे धीरे-धीरे किसानों को अन्य प्रजातियों की खेती पर आना होगा।
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किसानों को अधिक जागरुक रहना होगा
गन्ना शोध केंद्र के निदेशक डॉ जयप्रकाश सिंह का कहना है कि किसानों की जागरूकता को लेकर हमने शोध केंद्र पर प्रशिक्षण का कार्यक्रम चलाया था। हम किसानों से लगातार कह रहे है कि 0238 के विकल्प के रूप में दूसरी प्रजाति उगाएं। इसकी आयु पूरी हो चुकी है। अब यह प्रजाति तेजी से रोग पकड़ सकती है। जो किसान इसकी खेती कर रहे है उन्हें अधिक जागरुक रहने की आवश्यकता है।
किसानों को बढ़ाई आय : आजाद सिंह
मुंडभर गांव के किसान आजाद सिंह कहते हैं कि अच्छे अगोला और बेहतर उत्पादन के चलते यह प्रजाति किसानों की पहली पसंद है। अगर खेत अच्छा है तो अभी भी 75 क्विंटल का औसत उत्पादन प्रति बीघा होता है। इसी प्रजाति ने किसानों को सबसे ज्यादा लाभ दिया है।