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पीएम मोदी व योगी के बयान पर मौलाना अरशद मदनी का कटाक्ष..

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पत्रकारों से वार्ता करते मौलाना अरशद मदनी - फोटो : DEVBAND
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एक हाथ में लैपटॉप लेकर छात्र न कुरआन पढ़ सकेंगे और न नमाज: अरशद मदनी
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देवबंद (सहारनपुर)। पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ के मदरसा छात्रों को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने व एक हाथ में कुरआन और एक हाथ में लैपटापॅ वाले बयान पर लंबे समय बाद शीर्ष उलमा ने प्रतिक्रिया दी है। जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष, दारुल उलूम के सदर मुदर्रिस मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि हाथ में लैपटॉप लेकर छात्र न कुरआन पढ़ सकेंगे और न ही पांच वक्त की नमाज। हमें मजहबी जरुरतों को पूरा करने वालों और हमारे बच्चों को कुरआन की तालीम देने वालों की आवश्यकता है।
रविवार को अपने आवास पर मीडिया से बात करते हुए जमीयत अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने साफ लफ्जों में कहा कि यह हम जानते हैं कि मदरसों की शिक्षा कैसे अच्छी होगी। लैपटॉप लेकर होगी, मोबाइल लेकर होगी या सिर्फ कुरआन लेकर होगी। हम पहले भी कह चुके हैं और आज भी कहते हैं कि हमें ऐसे लोगों की जरुरत है जो लैपटॉप न लें बल्कि शहर और देहात की मस्जिदों और जंगलों में पांच वक्त की नमाज पढ़ा सकें।
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आतंकवाद के सवाल पर मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि मदरसों के दरवाजे हमेशा खुले हुए हैं। बल्कि 90 प्रतिशत मदरसे ऐसे हैं जिनमें दरवाजे तक नहीं हैं। सुबह से शाम तक कुत्ता, बिल्ली, गधा, घोड़ा जो चाहता है घुस जाता है, उसमें आदमी भी घुस सकता है। जाकर देखिए क्या पढ़ाया जाता है, किसको मारा जा रहा है किसके हाथ में छुरी है, कौन रिवाल्वर लिए बैठा है। मौलाना मदनी ने कहा कि मदरसों के अंदर कुत्ते भगाने के लिए बांस तक भी नहीं मिलेगा।
मौलाना अरशद मदनी ने सवाल उठाते हुए कहा कि सेना भर्ती को लेकर जिन्होंने गाडियां फूंकी, क्या वह किसी मदरसे के छात्र थे। हकीकत यह है कि किसी मदरसा छात्र ने आज तक कोई गाड़ी नहीं फूंकी, क्योंकि हमारी तालीम में इस अराजकता की कोई गुंजाइश ही नहीं है। यदि उन्हें किसी बात का विरोध करना होता है तो वह केवल गुस्से का इजहार कर देते हैं।
दारुल उलूम में पढ़ते थे हिंदू छात्र
देवबंद। मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि स्थापना के समय ही दारुल उलूम ने यह नियम बनाया था कि हम सरकार से कोई सहायता नहीं लेंगे। मुसलमानों तमाम दीनी इदारों को अपने चंदे से चलाएगा। दारुल उलूम आज भी उस पर कायम है। कहा कि दारुल उलूम ने हमेशा इंसानियत को तरजीह दी है। यही कारण है कि दारुल उलूम के शुरुआती दौर में हिंदू भाई भी यहां तालीम हासिल किए करते थे।
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हालात और सरकारें बदलती रहती हैं: मदनी
देवबंद। कुलहिंद राब्ता-ए-मदारिस इस्लामिया में मौलाना अरशद मदनी ने सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा की आज अमन का पैगाम देने वाले इदारे दारुल उलूम के निर्माण कार्यों पर पाबंदियां लगाई जा रही है। इससे पहले निर्माण की एक ईंट लगाने के लिए भी किसी की इजाजत नहीं लेनी पड़ी। क्योंकि कांग्रेस के बूढ़े जानते थे दारुल उलूम की देश की आजादी में क्या भूमिका है। लेकिन याद रखा जाना चाहिए कि हालात और सरकारें बदलती रहती है। उन्होंने कहा कि बहुत से लोग देश के करोड़ों अरबों रुपये लेकर फरार हो गए हैं। लेकिन हम देश के साथ खड़े हैं। कौन किसे वोट देता है या नहीं देता इससे हमारा कोई लेना देना नहीं है।

देवबंद की मस्जिद रशीदिया में उपस्थित मदरसा संचालक- फोटो : DEVBAND

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