- पहलवानों के लिए लंबे आंदोलन की चल रही तैयारी
- देशभर में चल सकता है खाप पंचायतों का सिलसिला
अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। सदियों से सर्वखाप के केंद्र सोरम गांव की पंचायत से फैसला का भाला कुरुक्षेत्र के लिए फेंक दिया गया है। संभावना जताई जा रही है कि लड़ाई लंबी चलेगी। देशभर में खापों और सर्वसमाज की पंचायतों का सिलसिला शुरू करने की रूपरेखा भी तैयार की जा सकती है।
पंचायत में वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप को याद किया गया। कविता सुनाई गई कि ‘कब तक बोझ संभाला जाए, द्वंद्व कहां तक पाला जाए, तू भी है राणा का वंशज, फेंक जहां तक भाला जाए...। फैसले की घड़ी में खाप चौधरियों ने सूझ बूझ और समन्वय के लिए सोरम का निर्णय सुरक्षित किया और कुरुक्षेत्र के मंच के लिए छोड़ दिया गया। सवाल यही है कि फैसला क्या होगा।
संभावना यह जताई जा रही है कि पहलवानों के लिए अब लंबी लड़ाई का सिलसिला शुरू होगा। भाकियू प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने कहा कि समाधान होने तक हर समाज के पास जाएंगे, पंचायतें करेंगे और लोगों को जागरूक किया जाएगा। अब देखने वाली बात यह होगी कि कुरुक्षेत्र की धरती पर क्या-क्या एलान किया जाते हैं और आंदोलन का क्या स्वरूप बनता है।
... कह सकते हैं जाटों के भांजे थे सम्राट मिहिर सिंह
मुजफ्फरनगर। भाकियू प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने कहा कि सम्राट मिहिर भोज के समय जातियां नहीं थी। किसी भी योद्धा की कोई जाति नहीं होती। वह महान व्यक्तित्व थे। गुर्जर और राजपूत समाज को एकजुट रहना चाहिए। कहने के लिए तो हम यह भी कह सकते हैं कि सम्राट जाटों के भांजे थे, लेकिन योद्धा किसी एक जाति का नहीं होता। उनके कार्य समाज को हमेशा प्रेरणा देते रहेंगे।
जाट सांसदों से मांगा गया इस्तीफा
सोरम की पंचायत में मंच से वक्ताओं ने यहां तक कह दिया कि जाट सांसदों को इस्तीफा दे देना चाहिए। आखिर ऐसे पद किस काम के हैं, जो बेटियों की रक्षा और सम्मान से भी बड़े बन गए हैं।
दिल्ली-यूपी के बाहर होनी चाहिए जांच
पंचायत में यह भी कहा गया कि पहलवानों के प्रकरण की जांच दिल्ली और यूपी के बाहर किसी अन्य राज्य में कराई जानी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ही जांच एजेंसी तय करें।
भाकियू ने किया पैदल मार्च, दिया मांगपत्र
भाकियू जिलाध्यक्ष योगेश शर्मा के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने महावीर चौक से कचहरी तक पहलवानों के समर्थन में पैदल मार्च किया। जिलाध्यक्ष ने कहा कि संगठन पहलवानों की लड़ाई जारी रखेगा। कलेक्ट्रेट में पहुंचकर मांगपत्र सौंपा गया।