संवाद न्यूज एजेंसी
खतौली। जैन मंदिरों में श्रद्धालु ने दशलक्षण पर्व पर उत्तम आर्जव धर्म की आराधना करते हुए इसके पालन का संकल्प लिया गया है। अरुण जैन ने बताया सरलता ही आर्जव धर्म है। जीवन में सादगी सरलता तथा विनम्रता आर्जव धर्म के मुख्य अंग है। कभी किसी के साथ कपट व्यवहार मत करों। छल कपट एवं धोखाधड़ी से मनुष्य का पतन निश्चित है। आर्जव धर्म का पालन करने वाला देश धर्म और समाज की महान सेवा करता है।
इससे पूर्व जिनेंद्र भगवान का अभिषेक पवित्र मंत्रोच्चारण के साथ किया। भागीरथी मंदिर में भक्तामर गीतमाला और जैन मंडी मंदिर में भव्य भजन प्रतियोगिता आयोजित की गई है। ब्रह्मचारिणी अर्चना दीदी व आरती दीदी के सान्निध्य में धर्म की ज्ञान गंगा का श्रद्धालु आनंद ले रहे है। इस अवसर पर विकास, संजय, मनीष, अशोक, बबलू, सुखानंद, दिनेश श्रीपाल, पवन, विपिन, किशोर, सुधीर मुखिया, अनुपम, राजू भैंसी, हरिश्चंद्र, मुकेश, पवन, प्रेम, हंस कुमार, मुकेश अंबर, शशांक, हितेश, पंकज, मनोज, मुनेश, वैभव, विवेक, कल्पेंद्र, डॉ. ज्योति जैन, अनुराग जैन, मोहित, नीरज जैन आदि उपस्थित रहे।