अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। सामूहिक दुष्कर्म के सात आरोपियों को अदालत ने सुबूतों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया है। सत्र परीक्षण के दौरान एक आरोपी की मृत्यु हो गई थी। नाबालिग होने के कारण तीन आरोपियों का परीक्षण किशोर न्यायालय में विचाराधीन है।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता विवेक त्यागी और ठाकुर चंद्रपाल सिंह ने बताया कि चार जून 2014 को पीड़िता रात के समय गांव जाने के लिए शाहपुर में बस स्टैंड पर तांगे का इंतजार कर रही थी। इसी दौरान एक आरोपी उसे तांगे में बैठाने का झांसा देकर कब्रिस्तान ले गया। पीड़िता के साथ 11 लोगों पर दुष्कर्म करने का आरोप था।
वादी ने दंगों की धाराओं के साथ सामूहिक बलात्कार की धाराओं में अज्ञात में मुकदमा दर्ज कराया था। विवेचक ने शाहपुर कस्बे के 11 आरोपियों के नाम का खुलासा किया था। तफ्तीश के बाद सभी के खिलाफ दंगों के साथ सामूहिक दुष्कर्म की धाराओं में आरोप पत्र दाखिल किया। घटना के तथ्यों का अवलोकन करने के बाद अदालत में दंगों की धाराओं को चार्ज नहीं बना।
सत्र परीक्षण के दौरान एक आरोपी छोटू उर्फ राजू की मृत्यु हो गई थी। तीन नाबालिग आरोपियों को केस किशोर न्यायालय में लंबित है। अपर सत्र न्यायाधीश ( पॉक्सो एक्ट द्वितीय) अंजनी कुमार सिंह ने मामले में बुधवार को फैसला सुनाया। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद आरोपी वसीम उर्फ छांगा, काला, शहजाद, आरिफ, शमशाद, नसीम उर्फ बिल्ली और अहसान को दोष मुक्त कर दिया है।