शाहपुर। आर्य समाज द्वारा श्रावणी पर्व पर आयोजित यज्ञ और सत्संग के समापन पर पाखंड, अंधविश्वास और कुरीतियों को त्यागने का संकल्प लिया गया। संतों और विद्वानों ने भावी पीढ़ी को वैदिक संस्कृति से जोड़ने का आह्वान किया।
क्षेत्र के गांव गोयला में श्रावणी पर्व पर आयोजित यज्ञ की पूर्णाहुति पर ग्रामीणों ने बड़ी संख्या में आहुतियां दी। वैदिक संस्कार चेतना अभियान संयोजक आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि वेदानुकूल आचरण से जीवन, समाज और राष्ट्र का निर्माण करें। वेद मंत्रों को पढ़िए और अर्थ समझिए, जीवन को सत्य, न्याय और नैतिक पथ मिल जाएगा। संस्कृति बचेगी, तभी राष्ट्र की रक्षा होगी।
शुकतीर्थ से पधारे स्वामी सत्यवेश ने कहा कि पुण्य और शुभ कर्मों में जीवन लगाए। पाखंड, ढोंग, कुरीतियों को त्यागकर वैदिक मार्ग पर चले। उन्होंने प्रेरक भजन भी सुनाये।
पूर्व सांसद हरेंद्र मलिक ने कहा कि ऋषि दयानंद की चेतना से देश जाग्रत हुआ था। आजादी आंदोलन में आर्य समाज का योगदान अतुलनीय है। यज्ञ पुरोहित कंवर पाल सिंह तथा यज्ञमान जितेंद्र आर्य एवं मंजू देवी रही। आचार्य गुरुदत्त आर्य एवं स्वामी सत्यवेश ने यज्ञ अभियान से जुड़े लोगों को वैदिक साहित्य और प्रमाण पत्र भेंट किये। आर्य प्रतिनिधि सभा के उप प्रधान गजेंद्र राणा, , योगेश्वर दयाल, कुमार मुनि आदि ने विचार रखें। सुरेंद्र आर्य, मास्टर जितेंद्र सिंह, गैसपाल आर्य, अनिल बालियान, गजेंद्र सिंह, जयपाल आर्य, धीर सिंह आर्य आदि मौजूद रहे। संचालन हरवीर सिंह आर्य ने किया।