- संयुक्त कृषि निदेशक ने एडीएम वित्त एवं राजस्व मुजफ्फरनगर को पत्र भेजकर दी जानकारी
अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। चार साल पुराने चर्चित फार्म मशीनरी बैंक योजना (कृषि यंत्र) में अपात्रों को लाभ देने के मामले में संयुक्त कृषि निदेशक सहारनपुर डॉ. वीरेंद्र कुमार ने एडीएम वित्त एवं राजस्व मुजफ्फरनगर को पत्र भेजकर कहा कि कोई जांच रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है। यह भी कहा गया कि अगर जांच की की कोई दूसरी प्रति है, तो वह उपलब्ध कराई जाए, ताकी अग्रिम कार्रवाई की जा सके। 23 समूहों को 10-10 लाख रुपये का अनुदान दिया गया था। यह गड़बड़ी दो करोड़ तीस लाख रुपये की हुई।
मामला अगस्त 2018 में शुरू हुआ। आरटीआई कार्यकर्ता सुमित मलिक ने फार्म मशीनरी बैंक योजना में अपात्रों को लाभ देने का आरोप लगाते हुए पांच बिंदुओं पर शिकायत की थी। तत्कालीन सीडीओ अर्चना वर्मा ने जांच कराई। जिसमें यह पुष्टि हुई थी कि कृषि विभाग ने कृषि समूहों को पहले आओ पहले पाओ के आधार पर लाभान्वित किया था, जबकि सबसे पहले लघु एवं सीमांत किसानों को सक्षम स्तर से सत्यापन करने के बाद लाभान्वित करना था, लेकिन सही प्रक्रिया नहीं अपनाई गई थी।
विभाग ने यह भी जांच नहीं की कि लाभान्वित समूहों के पास पहले से संयंत्र हैं या नहीं। डीएम कार्यालय से अग्रिम कार्रवाई के लिए संयुक्त कृषि निदेशक सहारनपुर को वर्ष 2019 में आख्या भेज दी गई थी, लेकिन चार साल बाद भी यह रिपोर्ट सहारनपुर नहीं पहुंच सकी है। एडीएम वित्त एवं राजस्व गजेंद्र कुमार के पत्र के बाद संयुक्त कृषि निदेशक सहारनपुर ने दोबारा पत्र भेजा है। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट नहीं मिली है। अब तक ऐसा कोई मामला लंबित नहीं है। अगर जांच की कोई दूसरी प्रति उपलब्ध है तो उसे उपलब्ध कराया जाए, ताकी कार्रवाई की जा सके।
इस मामले में कब क्या हुआ
- 31 अगस्त 2018, कृषि उत्पादन आयुक्त से शिकायत
- 12 अक्तूबर 2018, जांच पूरी हुई
- 20 फरवरी 2019 को रिपोर्ट सहारनपुर भेजी गई
बड़े नाम शामिल, कहां गुम हुई रिपोर्ट
एडीएम वित्त एवं राजस्व गजेंद्र कुमार की ओर से पिछले महीने भेजे गए पत्र में 20 फरवरी 2019 को जिक्र किया गया था। साथ ही साक्ष्य भी दिए गए थे। इस प्रकरण में कई बड़े नाम शामिल है। सवाल यह है कि आखिरकार यह जांच रिपोर्ट कहां गुम हो गई। इतने महत्वपूर्ण मामले में किसने लापरवाही की। इसकी जांच की मांग भी शिकायतकर्ता सुमित मलिक ने की है। सरकारी योजना का दुरुपयोग कर अपात्रों को लाभ दिया गया था। जिले के कई बड़े लोग प्रकरण में शामिल हैं। वह लगातार प्रयास कर रहे हैं कि पात्र किसानों को ही योजना का लाभ मिले।