मृतकों की स्मृति में यहां शहीद चौक बना हुआ है, जिस पर 25 शहीदों के नाम अंकित हैं। फक्करशाह चौक पर 17 मृतकों के नाम दिए गए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि 42 साल बाद भी मामले की जांच रिपोर्ट सामने नहीं आ पाई।
चरथावल कस्बे के मोहल्ला शेखजादगान पूर्वी के डॉ. मुस्तफा इमरजेंसी का जिक्र आते ही भावुक हो जाते हैं। वह बताते हैं कि उन्हें 25 जून 1975 को आपातकाल के दौरान मुख्य बाजार से उठाकर जेल भेजा था। तब वह डीएवी कॉलेज में छात्र नेता थे। इमरजेंसी के दौरान करीब साढ़े तीन महीने जेल में बंद रहे।
इसलिए भड़क उठा था आक्रोश
प्रशासन ने जिला अस्पताल और सोल्जर्स बोर्ड में कैंप लगाए थे। बुजुर्गों और जवानों को जबरदस्ती पकड़ कर कैंप में ले जाया जा रहा था, जिसकी वजह से आक्रोश भड़का। लोग सड़कों पर आ गए और पुलिस ने गोली चला दी थी।
नाराजगी से बदल गया सियासत का गणित
1971 के लोकसभा चुनाव में सीपीआई के विजयपाल सिंह ने भारत रत्न चौधरी चरण सिंह को हराकर सुर्खियां बटोरी थी। लेकिन इमरजेंसी के बाद 1977 के चुनाव में पासा पलट गया। तब भारतीय लोकदल के टिकट पर सईद मुर्तजा ने कांग्रेस के वरुण सिंह को हरा दिया था। सईद मुर्तजा को 270644 लाख और वरुण सिंह को 87985 वोट मिले थे।