मुजफ्फरनगर। रामपुर तिराहा कांड में कड़ी सुरक्षा के बीच उत्तराखंड से पीड़िता गवाही के लिए अदालत पहुंची। अपर जिला जज एवं सत्र न्यायालय संख्या सात के पीठासीन अधिकारी शक्ति सिंह ने अगली सुनवाई के लिए छह दिसंबर की तिथि तय की है।
शासकीय अधिवक्ता फौजदारी राजीव शर्मा, सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी परवेंद्र सिंह, उत्तराखंड संघर्ष समिति के अधिवक्ता अनुराग वर्मा और महेंद्र यादव ने बताया कि बृहस्पतिवार को सुनवाई हुई। सीबीआई बनाम राधा मोहन द्विवेदी की पत्रावली में सीबीआई ने पीड़िता को अदालत में पेश किया। उत्तराखंड से पुलिस कड़ी सुरक्षा में पीड़िता को लेकर पहुंची। अदालत में सुनवाई के दौरान भी पीड़िता और अधिवक्ताओं के अलावा किसी को कोर्ट रूम में नहीं जाने दिया गया। सुनवाई के बाद पीड़िता को स्थानीय पुलिस ने उत्तराखंड के बॉर्डर तक कड़ी सुरक्षा में छुड़वाया।
यह था मामला
एक अक्तूबर, 1994 को अलग राज्य की मांग के लिए देहरादून से बसों में सवार होकर आंदोलनकारी दिल्ली के लिए निकले थे। देर रात रामपुर तिराहा पर पुलिस ने आंदोलनकारियों को रोकने का प्रयास किया। आंदोलनकारी नहीं माने तो पुलिसकर्मियों ने फायरिंग कर दी, जिसमें सात आंदोलनकारियों की मौत हो गई थी। सीबीआई ने मामले की जांच की और पुलिस पार्टी और अधिकारियों पर मुकदमे दर्ज कराए थे। गंभीर धाराओं के सेशन ट्रायल मुकदमों की सुनवाई के लिए हाईकोर्ट ने जिले के अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर सात के पीठासीन अधिकारी शक्ति सिंह को अधिकृत किया है।