मुजफ्फरनगर। ठंड ने लोगों की मुश्किलें बढ़ानी शुरू कर दी है। लोग भले ही कंपकंपा रहे हो, लेकिन शहर में अभी तक अलावा नहीं जले। रैन बसेरों में इंतजाम अधूरे हैं। किसी के सामने टाट पर सोने की मजबूरी है तो किसी के पास गद्दे पहुंच गए, लेकिन अभी तक रजाई नहीं मिली है। उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने अस्पतालों और रैन बसेरों में लोगों के लिए पर्याप्त इंतजाम करने के निर्देश जारी कि ए हैं। आदेश हुए, लेकिन अभी तक पालन आधा-अधूरा ही हो सका है। इस पर अमर उजाला ने सोमवार रात लाइव किया तो इन रैन बसेरों की स्थिति खुलकर सामने आ गई।
जिला अस्पताल: यहां के रैन बसेरे में मिले अशोक कुमार का कहना है कि वह पांच महीने से रह रहे हैं। कपड़ों की व्यवस्था खुद की है। रैन बसेरे में सोमवार को चार गद्दे डलवाए गए हैं, लेकिन अभी तक रजाई नहीं दी गई। यहां पर महिला प्रेमा टाटपट्टी पर सोती नजर आई।
रेलवे रोड: नगरपालिका के रैन बसेरे में कोई ठहरा हुआ नहीं है। कारण साफ है कि यह बंद हैं और यहां रैन बसेरे के बड़े हिस्से में कूड़ा डाल दिया गया है।
रेलवे स्टेशन: शहर के रेलवे स्टेशन पर भी आश्रय स्थल बनाया गया है। यह आश्रय गृह लोगों का ठिकाना बन रहा है। शहर आजीविका मिशन की ओर से चलाए जा रहे रैन बसेरे में इंतजाम से यहां पर ठहरे हुए लोग जरूर संतुष्ट नजर आए। सबसे अधिक लोग भी यहीं पर ठहरे हुए हैं।
प्रशासन देख रहा है इंतजाम : अंजू अग्रवाल
चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल का कहना है कि हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद उन्हें कोई पावर प्रशासन ने अब तक नहीं दी है। रैन बसेरे और अलाव का काम भी प्रशासन ही देख रहा है। ईओ अभी तक पालिका कार्यालय नहीं पहुंचे हैं।
अलाव जलाए, नहीं होने देंगे परेशानी
एडीएम प्रशासन नरेंद्र बहादुर सिंह का कहना है कि अलाव जलाए गए हैं। देहात क्षेत्र में कई जगह शुरू हो गए हैं। अगर कहीं शुरू नहीं हुए हैं तो जल्द से जल्द इंतजाम होंगे। रैन बसेरों में भी पर्याप्त व्यवस्था कराई जाएगी।