- 32 साल पुरानी घटना के बाद तीन आरोपियों की हो चुकी मौत
- अदालत में 32 साल बाद शुरू, चार के गैर जमानती वारंट और 82 कार्रवाई
अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। प्रदेश के सबसे चर्चित 32 साल पुराने धौलड़ी कांड में पुलिसकर्मी की हत्या में फरार चल रहे चार आरोपियों का अब तक सुराग नहीं लग सका है। अदालत ने चार आरोपियों के गैर जमानती वारंट और 82 की कार्रवाई की है। केस लंबित होने के दौरान तीन हत्यारोपियों की मृत्यु हो चुकी है। हाईकोर्ट से स्थगन आदेश खारिज होने के बाद एक आरोपी को अदालत ने जेल भेज दिया है।
जुलाई वर्ष 1991 में जिले के तितावी थाना क्षेत्र के गांव धौलड़ी कांड में आरोपी कानून के फंदे में फंस गए है। धौलड़ी गांव में डकैती की सूचना पर दबिश देने पुलिसकर्मी सादी वर्दी में पहुंचे थे। मगर, ग्रामीणों ने बदमाश समझकर लाइसेंस बंदूकों से फायरिंग कर दी थी। फायरिंग में हेड कांस्टेबल हरेंद्र की मौत हो गई थी। पुलिसकर्मी रामभूल सिंह और जवाहर सिंह घायल हो गए थे।
तत्कालीन थानाध्यक्ष कुंवरपाल वर्मा ने सात ग्रामीणों को नामजद करते हुए 50-60 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा कायम कराया था। शासन के आदेशों पर तफ्तीश सीबीसीआईडी को सुपुर्द हो गई थी। जांच एजेंसी के विवेचक ने एक आरोपी जगलेश कुमार के नाम जोड़ते हुए आठ आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया। इसके बाद आरोपियों ने हाईकोर्ट चले गए और गिरफ्तारी पर स्थगन आदेश प्राप्त कर लिया था। इसी वजह से केस की कार्रवाई लंबित चल रही थी।
इस तरह खत्म हुआ हाईकोर्ट का स्टे
उच्च न्यायालय ने जून वर्ष 2022 में आरोपियों की गिरफ्तारी का स्टे खत्म कर दिया था। इसके बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने आठों आरोपियों की तलब करने के लिए नोटिस भेजे। मगर, नियत तिथियों पर हाजिर नहीं होने के कारण सात सितंबर वर्ष 2022 को आरोपियों के गैर जमानती वारंट और सीआरपीसी की धारा 82 की कार्रवाई कर दी। इसके बावजूद पुलिस चार आरोपियों को ढूंढ नहीं पा रही है।
चार आरोपियों की पत्रावली अलग
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी नीरज कांत मलिक एवं परमेंद्र कुमार ने बताया सीजेएम ने फरार मुलजिम धौलड़ी निवासी तेजपाल और गरीबा एवं बुड़ीना कलां निवासी सतपाल और जोगेंद्र उर्फ बाला की पत्रावली अलग कर दी। चारों के खिलाफ अदालत में गैर जमानती वारंट और 82 की कार्रवाई की पत्रावली लंबित है। वहीं एक आरोपी जसोई निवासी जगलेश का केस कमिट होने के बाद जिला सत्र न्यायालय में सत्र परीक्षण के लिए भेज दी गई। धौलड़ी निवासी नेपाल, जसवीर और हरवीर की केस के दौरान मृत्यु होने के कारण केस से नाम उपशमित (कम) कर दिए है।
जगलेश को बंदूक देकर बुढ़ापे में जाना पड़ा जेल
अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर सात शक्ति सिंह द्वारा आरोपी की जमानत अर्जी खारिज कर दी थी। आरोपी बुजुर्ग जगलेश जेल में है। हालांकि वादी तत्कालीन एसओ ने घटना के एफआईआर में आरोपियों में जगलेश का नाम नहीं शामिल किया था। मगर, सीबीसीआईड़ी की तफतीश में उसकी संलिप्तता पाई गई। वर्ष 1997 में जगलेश का नाम बढ़ाकर आठ आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र भेज दिया। दरअसल, उसकी दुकान जसोई पुलिस चौकी के पास थी। वहां रोजाना पुलिसकर्मियों का आना जाना रहता था। घटना की रात में पुलिस के कहने पर जगलेश ने कोरे कागज पर लिखवाकर हेड कांस्टेबल जवाहर को लाइसेंसी बंदूक दे दी थी।