फार्मेसी कौंसिल ने बी फार्मा और डी फार्मा की सीटें घटाईं
मुजफ्फरनगर। फार्मेसी कौंसिल ऑफ इंडिया ने भगवंत इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी के एम फार्मा और केशव फार्मेसी के बी फार्मा के आवेदन को निरस्त कर दिया है। अलमासपुर के श्रीराम कॉलेज और बाबा कॉलेज ऑफ फार्मेसी में सीटें घटा दी गई हैं। कॉलेजों में फार्मेसी कौंसिल की टीम ने दौरा किया। मानक अधूरे मिलने पर सीटें कम कर दी गई और नए कोर्स की मान्यता नहीं दी गई।
फार्मेसी कॉलेज चलाने के मानकों की प्रति वर्ष फार्मेसी कौंसिल ऑफ इंडिया द्वारा जांच की जाती है। जांच के बाद ही अगले सत्र के प्रवेश की अनुमति दी जाती है। फार्मेसी कौंसिल ऑफ इंडिया ने 21 अगस्त को 2022-23 में प्रवेश के लिए कॉलेजों की सूची जारी कर दी है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि कौन सा कॉलेज बी फार्मा, डी फार्मा और एम फार्मा में कितने प्रवेश लेगा। मुजफ्फरनगर में फार्मेसी के पांच कॉलेज हैं। इनमें बिजनौर रोड पर भगवंत इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी एवं भगवंत कॉलेज ऑफ फार्मेसी एक ही परिसर में हैं। इस संस्था के एम फार्मा की पढ़ाई कराने के लिए किए गए आवेदन को निरस्त किया गया है। इसके अलावा बी फार्मा में यहां 100 के स्थान पर 60 सीट कर दी गई हैं।
जिले के बरला-बसेड़ा मार्ग पर तेजलहेड़ा में स्थित केशव फार्मेसी ऑफ कॉलेज में डी फार्मा में 60 सीट की अनुमति दी गई है। यहां भी बी फार्मा की पढ़ाई की अनुमति नहीं दी गई। श्रीराम ग्रुप ऑफ कॉलेज अलमासपुर में डी फार्मा में सीटें 60 के स्थान पर 40 कर दी गई हैं। यहां फैकल्टी मानक के अनुरूप नहीं मिली। बरला-बसेडा मार्ग स्थित बाबा कॉलेज ऑफ फार्मेसी में बी फार्मा में 60 और डीएम फार्मा में सीटें घटाकर 40 कर दी गई हैं। एसडी कॉलेज ऑफ फार्मेसी की सीटें नहीं घटाई गई हैं। यहां बी फार्मा में 100, डी फार्मा में 60 और एम फार्मा में 21 सीटें हैं।
इन यूनिवर्सिटी से है मान्यता
फार्मेसी के कॉलेजों को उत्तर प्रदेश बोर्ड ऑफ टेक्निकल एजुकेशन गुरु गोविंद सिंह मार्ग लखनऊ और एपीजे अब्दुल कलाम टेक्निकल युनिवर्सिटी लखनऊ से मान्यता है।
किसने क्या कहा
केशव फार्मेसी कॉलेज के आरके सिंघल का कहना है कि बी फार्मा के लिए आवेदन किया था, लेकिन एनओसी नहीं मिल पाई है। भगवंत इंस्टीट्यूट मीरापुर के सह निदेशक राघव मेहरा का कहना है कि टीम ने दौरा किया था, लेकिन एनओसी नहीं मिली है।