फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Muzaffarnagar News: स्कूल थप्पड़ कांड पर शीर्ष कोर्ट ने पूछा-क्यों नहीं हुई साथी बच्चों की काउंसलिंग

Sat, 10 Feb 2024 12:04 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मुजफ्फरनगर
विज्ञापन
विज्ञापन
-मुजफ्फरनगर की घटना पर यूपी सरकार के ढुलमुल रवैये पर जताई नाराजगी
विज्ञापन


अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। मुजफ्फरनगर के एक स्कूल में शिक्षिका के कहने पर सहपाठी को थप्पड़ मारने की घटना पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक बार फिर यूपी सरकार को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने पूछा कि सहपाठी को पीटने के लिए उकसाए गए सभी बच्चों की काउंसलिंग क्यों नहीं कराई गई।

जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने कहा, हमने टीआईएसएस की नवीनतम रिपोर्ट देखी है जिसमें इस घटना में शामिल और गवाह सभी छात्रों की काउंसलिंग की मांग की गई थी। लेकिन राज्य ने कुछ भी नहीं किया। बहुत देर हो चुकी है। सुनवाई के दौरान जस्टिस ओका ने कहा, राज्य का हलफनामा देखें। हमारे निर्देशों का पूरी तरह उल्लंघन हुआ है। किसी भी बच्चे की काउंसलिंग नहीं की गई है। हमने संगठनों के नाम भी दिए थे। काउंसलिंग के निर्देश का अक्षरश: पालन होना चाहिए।
विज्ञापन


-

28 फरवरी तक मांगी रिपोर्ट

पीठ ने बच्चों की काउंसिलिंग पर अपने आदेश के अनुपालन को लेकर राज्य सरकार को 28 फरवरी तक हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई 1 मार्च को होगी। सुप्रीम कोर्ट महात्मा गांधी के परपोते तुषार गांधी की याचिका पर सुनवाई कर रहा है जिसमें एक मुस्लिम छात्र को थप्पड़ मारने के लिए उकसाने के लिए स्कूल शिक्षिका तृप्ता त्यागी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी। गौरतलब है कि इस घटना के वायरल वीडियो में तृप्ता त्यागी को छात्र के धर्म के बारे में अपमानजनक टिप्पणी करते और सहपाठियों को उसे पीटने के लिए उकसाते देखा गया था।
विज्ञापन


-

पहले भी लगाई थी फटकार

बाद में शिक्षिका ने एक वीडियो जारी कर इसके पीछे कोई सांप्रदायिक पहलू होने की बात से इन्कार किया था लेकिन माना कि उसने गलती की है। राज्य सरकार ने अक्तूबर में सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि स्कूल शिक्षिका को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 295ए के तहत आरोपों का सामना करना पड़ सकता है। इसके तहत किसी भी वर्ग के धर्म या धार्मिक विश्वासों का अपमान करके उसकी भावनाओं को आहत करने वाला दुर्भावनापूर्ण कृत्य दंडनीय अपराध है। शीर्ष कोर्ट ने पिछली सुनवाई के दौरान एफआईआर में प्रमुख आरोप हटाए जाने को लेकर यूपी पुलिस और सरकार के रवैये पर कड़ी आपत्ति जताई थी। साथ ही निर्देश दिया था कि जांच का नेतृत्व राज्य सरकार द्वारा नामित एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी करे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें