अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। लोकसभा चुनाव के नामांकन पत्रों की जांच का कार्य पूरा हो गया है। चुनाव के 72 साल के इतिहास में दूसरी बार ऐसा होगा, जब एक भी मुस्लिम प्रत्याशी मैदान में नहीं होगा। जिन 27 प्रत्याशियों के नामांकन निरस्त किए गए हैं, उनमें मुस्लिम भी शामिल हैं।
लोकसभा में पहली बार 1967 में मुस्लिम समाज से ताल्लुक रखने वाले लताफत अली ने सीपीआई के टिकट पर चुनाव जीता था। इसके बाद समाज के कई दिग्गजों ने यहां से चुनाव लड़ा। इनमें पूर्व गृहमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद, पूर्व मंत्री सईदुज्जमां और सबसे कम उम्र में चारों सदन में रहने का इतिहास बनाने वाले मुन्नवर हसन भी शामिल रहे। मुजफ्फरनगर दंगे से पहले वर्ष 2009 में आखिरी बार कादिर राना बसपा के टिकट पर चुनाव जीते थे।
19 और 24 में बिना खेले आउट
नामांकन में तकनीकि खामी के चलते वर्ष 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव में मुस्लिम समाज के प्रत्याशी बिना लड़े ही चुनाव से बाहर हो गए। पिछली बार भी चुनाव में कुल 10 प्रत्याशी थे और इस बार 11 प्रत्याशी चुनाव लड़ेंगे।
कब कौन रहा मुस्लिम सांसद
पहली बार वर्ष 1967 में मुस्लिम समाज का लोकसभा में प्रतिनिधित्व हुआ। मुजफ्फरनगर से सीपीआई के लताफत अली सांसद चुने गए थे। वर्ष 1977 में सईद मुर्तजा, 1980 गय्यूर अली, 1989 में मुफ्ती मोहम्मद सईद, 1999 में सईदुज्जमां , 2004 में मुन्नवर हसन और 2009 में कादिर राना मुजफ्फरनगर लोकसभा से सांसद चुने गए थे।
इस तरह खुला मुस्लिमों का खाता
वर्ष 1952 व 1957 के विधानसभा चुनाव से ही मुस्लिम प्रत्याशी मैदान में दमखम दिखा रहे हैं। पहले चुनाव में निर्दलीय सईद मुर्तजा दूसरे स्थान पर रहे थे। 1957 में पहली बार गय्यूर अली थानाभवन और बुढ़ाना से कुंवर असगर अली विधायक चुने गए थे। 1962 में अहमद बख्श, 1969 में सईद मुर्तजा, 1980 में मेहंदी असगर, 1985 में सईदुज्जमां, अमीर आलम, 1989 में अमीर आलम, 2007 में कादिर राना मोरना से विधायक चुने गए थे।
पहली बार चुने गए थे तीन विधायक
वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में बुढ़ाना से नवाजिश आलम, चरथावल से नूर सलीम राना और मौलाना जमील विधायक चुने गए थे। लेकिन इसके बाद 2017 और 2022 में भी मुस्लिम समाज के प्रत्याशी खाली हाथ रहे हैं।