खतौली। फूलों की खेती के प्रति किसानों के बढ़ते रूझान ने खतौली-मीरापुर मार्ग पर बसे गंगधाड़ी को नई पहचान दी है। रजनगंधा और ग्लाईडोला बड़ी मात्रा में रोजाना गाजीपुर मंडी सप्ताई किए। कभी कोलकाता के फूलों की पूरे देश में मांग थी, लेकिन अब गंगधाड़ी सबकी पहली पसंद है।
करीब छह हजार की आबादी के गांव गंगधाड़ी की फूलों की खेती से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान है। बदलते दौर में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसानों की परंपरागत खेती गन्ना बच चुकी है। करीब चार दशक पहले खतौली के इस गांव में किसानों ने गन्ना छोड़ फूलों की खेती की तरफ रुख किया।
वर्तमान में किसान खेतों में रजनीगंधा की डबल और सिंगल प्रजातियों का उत्पादन कर रहे हैं। गांव में दो दर्जन से ज्यादा किसान करीब 125 बीघा भू-भाग में विभिन्न प्रजातियों के फूलों का उत्पादन कर व्यावसायिक खेती में जुटे हैं। किसानों का कहना है ताजे फूलों का सप्लाई दिल्ली की गाजीपुर मंडी में करते हैं।
गन्ना छोड़ा, हमें मिला मुनाफा : राम प्रसाद
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फूल उत्पादक राम प्रसाद की की उम्र 76 साल है। वर्ष 1987 में उन्होंने फूलों की खेती की शुरूआत की। पांच बीघा में रजनीगंधा की डबल प्रजाति का उत्पादन कर रहे हैं। कहते है 12 महीने की खेती है। महंगी दवाओं के कारण भूमि की उपजाऊ शक्ति कम हाेती जा रही है। फूलों की खेती करने में सुकून मिलता है। फूलों से बेहतर कमाई की। गांव के फूलों की खुशबू दिल्ली की मंड़ियों से देश के बड़े शहरों और विदेश में महकती है।
रोज करते हैं सप्लाई : महक सिंह
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किसान महक सिंह को फूलों की खेती करते 32 साल हो गए। उनका कहना है ग्लाईडोला और रजनीगंधा फूलों की पैदावार 16 बीघा खेत में कर रहे है। रोजाना गाड़ियों के माध्यम से दिल्ली माल बेचते है। एक बंडल में 24 स्टीक फूलों की होती है। एक बार बुवाई के बाद दो साल तक फसल मिलती है। गन्ने की तरह पहले पौधा और बाद में पेड़ी से उत्पादन होता है। मंडी में मांग के अनुरूप रेट मिलता है। 40-50 रुपये से 400 रुपये तक एक बंडल बिक जाता है। रजनीगंधा की बुवाई मार्च में पूरी हो जाती है।
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शादी समारोह में अधिक मांग : चौहान
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गंगधाड़ी के किसान सर्वेश चौहान के परिवार का करीब 40 साल से फूलों की खेती करते है। फिलहाल ढाई बीघा में ग्लाईडोला की सफेद प्रजाति का उत्पादन कर रहे हैं। विवाह समारोह में अधिक मांग रहती है। गाजीपुर मंडी में आपूर्ति करते है। मंडी में उतार चढ़ाव के कारण भाव में अनिश्चितता रहती है। खेती में जोखिम भी है। पिछले दो साल से उत्पादन लागत के अनुरूप मुनाफा नहीं मिल पाया।
कोलकाता के रजनीगंधा का तोड़ा वर्चस्व
महानगरों में गंगधाड़ी के फूलों की पहचान खतौली के नाम से है। बुजुर्ग किसान राम प्रसाद बताते है करीब 35 वर्ष पहले कोलकाता से रजनीगंधा फूलों की खेप विमान से दिल्ली मंडी आती थी। लेकिन 1992 से गंगधाड़ी के फूलों ने मंडी में जगह बना ली। होटलों और विवाह समारोहों में ताजा फूल उपलब्ध होने लगा। कुछ साल तक सीजन में किसान शाम को गाड़ियों से दिल्ली सप्लाई करते थे। खतौली की करीब 15 दुकानें दिल्ली मंडी में स्थापित है। उनके माध्यम से देश के कोने-कोने में यहां का फूल पहुंचता है।